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गेहूं-सरसों खरीद नियमों पर बवाल: सुरजेवाला बोले—‘तुगलकी फरमान’ से किसानों को राहत दे सरकार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चंडीगढ़। हरियाणा में गेहूं और सरसों की सरकारी खरीद को लेकर बनाए गए नए नियमों पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इन्हें “तुगलकी फरमान” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई प्रक्रियागत शर्तों के जरिए किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने से रोकने की कोशिश की जा रही है।


रविवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुरजेवाला ने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब सरकार ने नए नियमों के माध्यम से किसानों के सामने बाधाएं खड़ी करनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया को जानबूझकर इतना जटिल बनाया जा रहा है कि किसान खुद ही मंडियों में आने से हतोत्साहित हो जाएं।


ट्रैक्टर-ट्रॉली नियम पर उठाए सवाल

सुरजेवाला ने ट्रैक्टर-ट्रॉली के रजिस्ट्रेशन नंबर को अनिवार्य बनाने और फसल की फोटो लेकर पोर्टल पर अपलोड करने की शर्तों को अव्यावहारिक बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं है, वे इन नियमों का पालन कैसे करेंगे। साथ ही किराए के साधनों के उपयोग को लेकर भी उन्होंने स्पष्टता मांगी।


समय सीमा से बढ़ेगी परेशानी

सरकार द्वारा मंडियों में फसल लाने का समय सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक तय किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि कटाई के मौसम में किसान अक्सर रात के समय भी फसल लेकर मंडियों में पहुंचते हैं। ऐसे में यह समय सीमा लंबी कतारों, अतिरिक्त खर्च और अव्यवस्था को जन्म देगी।


बायोमेट्रिक अनिवार्यता पर भी विरोध

‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ पोर्टल के तहत बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाने पर सुरजेवाला ने कहा कि यह व्यवस्था किसानों के लिए व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि कटाई के दौरान किसान खेतों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में हर बार मंडी में उपस्थित होकर अंगूठा लगाना संभव नहीं होगा। इसके अलावा तकनीकी खामियों और इंटरनेट की समस्या से प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।


भूमिहीन किसानों के लिए मुश्किलें

उन्होंने पट्टे पर खेती करने वाले किसानों की स्थिति पर भी चिंता जताई। सुरजेवाला के अनुसार, ऐसे किसानों को जमीन मालिक की अनुपस्थिति में फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही फसल उठान के लिए तीन अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर की अनिवार्यता को भी उन्होंने अनावश्यक बताया।


खरीद लक्ष्य घटाने पर सवाल

सुरजेवाला ने सरकार से यह भी पूछा कि गेहूं खरीद का लक्ष्य 80 लाख टन से घटाकर 72 लाख टन क्यों किया गया है, जबकि बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीकरण कराया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन नियमों में तुरंत सुधार नहीं किया, तो किसान और खेत मजदूर आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक घमासान तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।

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