“क्या सुप्रीम कोर्ट से भी ज्यादा ताकतवर है हाईकोर्ट? जानिए अनुच्छेद 226 का ‘ब्रह्मास्त्र’ जिससे जवाबदेह बनती हैं सरकारें”
- धन्ना राम चौधरी

- 19 मार्च
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली। देश की न्यायिक व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट को सर्वोच्च माना जाता है, लेकिन भारतीय संविधान का एक ऐसा प्रावधान है जो विशेष परिस्थितियों में हाईकोर्ट को असाधारण शक्तियां प्रदान करता है। यह प्रावधान है अनुच्छेद 226, जिसे कानूनी हलकों में हाईकोर्ट का “ब्रह्मास्त्र” भी कहा जाता है। यही वजह है कि कई बार सरकारें भी इसके इस्तेमाल से सतर्क रहती हैं।
सुप्रीम कोर्ट बनाम हाईकोर्ट: शक्ति का असली संतुलन
आम धारणा के विपरीत, हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट से ऊपर नहीं है, लेकिन अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) के एक अहम पहलू में उसकी शक्ति अधिक व्यापक मानी जाती है।
अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट मुख्य रूप से केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में हस्तक्षेप करता है, जबकि अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के संरक्षण का भी अधिकार देता है।
अनुच्छेद 226: क्यों कहा जाता है ‘सुपर पावर’?
अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को रिट जारी करने की व्यापक शक्ति देता है। इसके तहत हाईकोर्ट निम्न मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है:
सरकारी नीतियों या आदेशों की वैधता की जांच
प्रशासनिक अन्याय या मनमानी के खिलाफ कार्रवाई
कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवाद (जैसे प्रमोशन, ट्रांसफर)
किसी भी वैधानिक अधिकार के उल्लंघन की स्थिति
यानी, जहां सुप्रीम कोर्ट का दायरा सीमित है, वहीं हाईकोर्ट आम नागरिक के रोजमर्रा के कानूनी अधिकारों की भी रक्षा कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्चता बरकरार
हालांकि अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को व्यापक अधिकार देता है, लेकिन इससे सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्चता कम नहीं होती।
अनुच्छेद 141 के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी होते हैं। इसके अलावा अनुच्छेद 136 के तहत कोई भी व्यक्ति हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है।
पहले हाईकोर्ट जाने की सलाह क्यों?
कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट स्वयं यह कह चुका है कि यदि किसी मामले में अनुच्छेद 226 के तहत राहत संभव है, तो याचिकाकर्ता को पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुलभ बनती है।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अनुच्छेद 226 भारतीय लोकतंत्र में “चेक एंड बैलेंस” की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। यह न केवल नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने का माध्यम है, बल्कि सरकारों को भी जवाबदेह बनाए रखने का प्रभावी उपकरण है।
संक्षेप में, हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट से ऊपर नहीं है, लेकिन अनुच्छेद 226 के तहत उसकी शक्तियां इतनी व्यापक हैं कि वह आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा में पहली और सबसे मजबूत ढाल बन जाता है। यही कारण है कि इस प्रावधान को भारतीय संविधान की सबसे प्रभावशाली व्यवस्थाओं में गिना जाता है।
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