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केरल में कांग्रेस की बढ़ी ‘सीएम टेंशन’! दावेदारों की जिद से फंसा फैसला, कार्यकर्ताओं में बेचैनी

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 12
  • 4 min read
“केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच राजनीतिक खींचतान और बैठक का दृश्य”
“केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच राजनीतिक खींचतान और बैठक का दृश्य”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली, 12 मई। केरल विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बावजूद कांग्रेस पार्टी अब मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर गंभीर अंदरूनी खींचतान का सामना कर रही है। चुनाव परिणाम आए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी, सहयोगी दलों का दबाव और केंद्रीय नेतृत्व की अलग-अलग प्राथमिकताओं ने स्थिति को जटिल बना दिया है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता संभालने से पहले संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की बन गई है। केरल में यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब अन्य राज्यों में नई सरकारों ने कामकाज शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार सक्रिय हो चुकी है, असम में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, जबकि तमिलनाडु में भी राजनीतिक समीकरण स्पष्ट हो चुके हैं।

कौन-कौन हैं मुख्यमंत्री पद की दौड़ में?

केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के आधार पर खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं। दूसरी ओर V. D. Satheesan युवा नेतृत्व और जनाधार को अपनी ताकत बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस संगठन महासचिव K. C. Venugopal का नाम भी शीर्ष दावेदारों में शामिल है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर एक फॉर्मूले पर चर्चा हुई जिसमें केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री, रमेश चेन्निथला को विधानसभा अध्यक्ष और वीडी सतीशन को महत्वपूर्ण मंत्रालय देने का प्रस्ताव सामने आया। हालांकि बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने इस व्यवस्था पर असहमति जताई है।

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि वीडी सतीशन ने साफ संकेत दिए हैं कि वे केवल मुख्यमंत्री पद स्वीकार करेंगे, जबकि रमेश चेन्निथला भी अपने अनुभव को नजरअंदाज किए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

IUML की भूमिका ने बढ़ाया दबाव

केरल की राजनीति में सहयोगी दल Indian Union Muslim League की भूमिका इस बार निर्णायक मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि IUML खुलकर वीडी सतीशन के समर्थन में है। यही कारण है कि अपेक्षाकृत कम कांग्रेस विधायकों का समर्थन होने के बावजूद सतीशन की दावेदारी मजबूत बनी हुई है।

140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने 63 सीटें जीती हैं, जबकि IUML को 22 सीटों पर सफलता मिली है। गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन मुख्यमंत्री चयन में सहयोगी दलों की सहमति अहम बन गई है।

दूसरी तरफ, केसी वेणुगोपाल को कांग्रेस विधायकों के एक बड़े वर्ग का समर्थन बताया जा रहा है, लेकिन सहयोगी दलों के भीतर उनके नाम को लेकर पूर्ण सहमति नहीं दिख रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वेणुगोपाल मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा सदस्य बनना होगा, जिसके लिए किसी विधायक को सीट छोड़नी पड़ सकती है।

पोस्टरबाजी से बढ़ी नाराजगी

चुनाव परिणाम आने के बाद से केरल और दिल्ली में कई स्थानों पर समर्थकों द्वारा पोस्टरबाजी की गई। वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के समर्थन में लगाए गए पोस्टरों ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत रोकने के निर्देश दिए। इसके बाद पोस्टर हटाए गए, लेकिन समर्थकों की सक्रियता और बेचैनी कम नहीं हुई। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कांग्रेस नेतृत्व निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों कर रहा है।

कांग्रेस के सामने पुरानी चुनौती

राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस मुख्यमंत्री चयन को लेकर उलझी हो। इससे पहले Karnataka में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच शक्ति संतुलन का मुद्दा चर्चा में रहा। Rajasthan, Madhya Pradesh और Chhattisgarh में भी गुटबाजी के कारण पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था।

विश्लेषकों का कहना है कि केरल में यदि फैसला जल्द नहीं हुआ तो यह जीत के बाद भी कांग्रेस के लिए नकारात्मक संदेश बन सकता है।

आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A)

Q1. केरल में मुख्यमंत्री चयन में देरी क्यों हो रही है?

मुख्य वजह कई वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी और सहयोगी दलों की अलग-अलग पसंद मानी जा रही है।

Q2. सबसे मजबूत दावेदार कौन माना जा रहा है?

राजनीतिक चर्चाओं में वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं।

Q3. IUML की भूमिका कितनी अहम है?

गठबंधन में मजबूत संख्या होने के कारण IUML का समर्थन मुख्यमंत्री चयन में निर्णायक माना जा रहा है।

Q4. क्या कांग्रेस नेतृत्व में मतभेद हैं?

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अलग-अलग नेताओं की पसंद अलग हो सकती है, लेकिन पार्टी की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है।

Q5. क्या मुख्यमंत्री चयन में और देरी हो सकती है?

यदि सभी गुटों में सहमति नहीं बनती तो फैसला आगे खिंच सकता है।

निष्कर्ष: केरल में कांग्रेस की जीत जितनी बड़ी रही, मुख्यमंत्री चयन उतना ही जटिल बनता जा रहा है। पार्टी के सामने अब केवल सरकार गठन नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की भी चुनौती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व जल्द सर्वसम्मति वाला फैसला नहीं लेता, तो यह अंदरूनी असंतोष भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। खास बात यह है कि पहली बार सहयोगी दलों का दबाव मुख्यमंत्री चयन में इतनी खुलकर दिखाई दे रहा है, जो आने वाले समय में गठबंधन राजनीति की नई दिशा तय कर सकता है।

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Source: राजनीतिक सूत्र, कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक बयान, चुनाव परिणाम आधारित जानकारी, गठबंधन दलों की प्रतिक्रियाएं।

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