केरल में CM फेस पर कांग्रेस में खींचतान! राहुल गांधी की पसंद बने केसी वेणुगोपाल, सतीशन गुट नाराज
- धन्ना राम चौधरी

- 11 मई
- 4 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली, 11 मई। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। चुनावी जीत के उत्साह के बीच कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi मुख्यमंत्री पद के लिए अपने करीबी और भरोसेमंद सहयोगी K. C. Venugopal को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि पार्टी के भीतर इस नाम को लेकर एकमत नहीं बन पाया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि कांग्रेस हाईकमान अगले दो दिनों में विधायकों और सहयोगी दलों से बातचीत कर अंतिम निर्णय ले सकता है। इसी बीच मुख्यमंत्री पद की दौड़ ने पार्टी के अंदर पुराने गुटीय समीकरणों को फिर से उजागर कर दिया है।
दिल्ली बैठक से पहले राहुल-वेणुगोपाल की अलग मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के आवास पर हुई अहम बैठक से पहले राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल के साथ अलग से मुलाकात की। इस मुलाकात को मुख्यमंत्री पद के चयन से जोड़कर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने उन पोस्टरों का भी जिक्र किया जिनमें कथित तौर पर वेणुगोपाल का मजाक उड़ाया गया था। पार्टी के अंदर यह चर्चा रही कि इन पोस्टरों के पीछे विपक्ष के नेता V. D. Satheesan समर्थक गुट की भूमिका हो सकती है।
सतीशन ने वेणुगोपाल के नाम पर जताई आपत्ति
बैठक में वीडी सतीशन ने कथित तौर पर स्पष्ट कहा कि वे केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क था कि कांग्रेस महासचिव के रूप में वेणुगोपाल संगठनात्मक प्रभाव का इस्तेमाल कर विधायकों के बीच गुटबाजी बढ़ाते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार सतीशन ने यह भी कहा कि उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर सभी विधायकों को साथ लेकर काम किया और व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए कभी गुट नहीं बनाए। उन्होंने कुछ विधानसभा सीटों का जिक्र करते हुए दावा किया कि यदि उम्मीदवार चयन में वेणुगोपाल समर्थित नामों को प्राथमिकता नहीं दी गई होती तो कांग्रेस और अधिक सीटें जीत सकती थी।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कौन-कौन?
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। संगठन में मजबूत पकड़ और राहुल गांधी के करीबी होने का उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है।
हालांकि दूसरी ओर वीडी सतीशन और Ramesh Chennithala भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। सतीशन को जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है और उन्हें कांग्रेस की सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन मिलने की भी चर्चा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन और जनाधार के बीच संतुलन बनाने की है। पार्टी को यह तय करना होगा कि वह केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरे को आगे करे या राज्य स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले स्थानीय नेता को मौका दे।
UDF की जीत के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF की जीत को पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय बाद कांग्रेस गठबंधन को राज्य में स्पष्ट जनादेश मिला है। ऐसे में मुख्यमंत्री चयन को लेकर लिया गया फैसला न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी जल्द सहमति नहीं बना पाती, तो इसका असर सरकार गठन और संगठनात्मक एकजुटता दोनों पर पड़ सकता है।
क्या हाईकमान करेगा अंतिम फैसला?
कांग्रेस परंपरागत रूप से मुख्यमंत्री चयन में केंद्रीय नेतृत्व की निर्णायक भूमिका रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि अंतिम फैसला राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और शीर्ष नेतृत्व की सहमति से होगा।
हालांकि यह भी साफ है कि पार्टी नेतृत्व किसी ऐसे निर्णय से बचना चाहेगा जिससे राज्य इकाई में असंतोष और गहरा हो।
FAQs
1. केरल में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे कौन है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केसी वेणुगोपाल फिलहाल सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
2. वीडी सतीशन क्यों चर्चा में हैं?
उन्होंने कथित तौर पर वेणुगोपाल के नाम पर आपत्ति जताई है और खुद भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
3. कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री चयन इतना अहम क्यों है?
क्योंकि UDF की बड़ी जीत के बाद गलत फैसला पार्टी में गुटबाजी बढ़ा सकता है।
4. राहुल गांधी की भूमिका क्या मानी जा रही है?
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी केसी वेणुगोपाल के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
5. क्या IUML किसी उम्मीदवार का समर्थन कर रही है?
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि IUML का झुकाव वीडी सतीशन की ओर माना जा रहा है।
निष्कर्ष: केरल में कांग्रेस की चुनावी जीत के बाद अब असली राजनीतिक परीक्षा मुख्यमंत्री चयन को लेकर शुरू हो गई है। पार्टी के सामने चुनौती केवल सरकार बनाने की नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन बनाए रखने की भी है। यदि नेतृत्व समय रहते सहमति बना लेता है तो यह कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में मजबूत वापसी का संकेत हो सकता है। वहीं लंबा खिंचता विवाद पार्टी की नई सरकार के लिए मुश्किलें भी पैदा कर सकता है।
Source: कांग्रेस नेताओं की बैठकों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स, सार्वजनिक राजनीतिक बयान और पार्टी सूत्रों पर आधारित जानकारी।
अब आपकी बारी!
आपके अनुसार केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए?
क्या कांग्रेस संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देगी या जमीनी नेतृत्व को?
अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।
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