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कांग्रेस सूची पर बंगाल में बवाल: मालदा दफ्तर में चलीं कुर्सियां, सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता/मालदा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले इंडियन नेशनल कांग्रेस द्वारा उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही राज्य के कई जिलों में विरोध और आक्रोश का माहौल देखने को मिला। खासतौर पर मालदा में स्थिति उस समय बिगड़ गई जब पार्टी कार्यालय के भीतर ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई और कुर्सियां तक चलने लगीं।


रविवार दोपहर कांग्रेस ने 284 उम्मीदवारों की सूची जारी की। सूची जारी होने के कुछ ही मिनटों बाद मालदा स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जमा हो गए। स्थानीय नेता आसिफ महबूब को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले से नाराज कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया।


स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि देखते ही देखते विवाद हाथापाई में बदल गया और कार्यालय के भीतर कुर्सियां फेंकी जाने लगीं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने का प्रयास किया। हालांकि, इस दौरान किसी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।


आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने न केवल पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की, बल्कि सड़कों पर उतरकर टायर जलाए और पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उम्मीदवार चयन में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है।


इस बीच कांग्रेस ने अपने प्रमुख नेताओं पर दांव खेलते हुए अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर सीट से मैदान में उतारा है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके चुनाव लड़ने से मुर्शिदाबाद, मालदा और नादिया जिलों की करीब 50 सीटों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं मालतीपुर से मौसम नूर को टिकट देकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी उम्मीदवार खड़ा किया है।


चुनाव कार्यक्रम की बात करें तो भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे। राज्य में 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जबकि 4 मई 2026 को मतगणना के बाद यह स्पष्ट होगा कि सत्ता में बदलाव होता है या एक बार फिर ‘खेला होबे’ का नारा गूंजता है। फिलहाल, उम्मीदवारों की घोषणा के बाद उभरा असंतोष कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है, जिसे संभालना पार्टी नेतृत्व के लिए जरूरी हो गया है।

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