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केरल चुनाव: महिला वोटर्स पर कांग्रेस का बड़ा दांव, मुफ्त बस सफर और बीमा योजनाओं से साधने की कोशिश

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 30
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोच्चि/तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस ने महिला मतदाताओं को केंद्र में रखते हुए कई लोकलुभावन घोषणाएं की हैं। पार्टी को उम्मीद है कि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, युवतियों को आर्थिक सहायता और बीमा जैसी योजनाएं चुनाव में उसे बढ़त दिला सकती हैं।


राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए होने जा रहे इस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। पिछले चुनाव में एलडीएफ ने 99 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि यूडीएफ को 41 सीटों से संतोष करना पड़ा था।


इस बार कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए महिला मतदाताओं को विशेष प्राथमिकता दी है। पार्टी ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की घोषणा की है, वहीं युवतियों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता और 25 लाख रुपये तक का बीमा कवर देने का वादा किया है। इन योजनाओं के जरिए कांग्रेस महिला वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।


चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो केरल में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। राज्य में कुल लगभग 2.70 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.38 करोड़ महिलाएं और 1.31 करोड़ पुरुष शामिल हैं। ऐसे में महिला मतदाता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने दावा किया है कि राज्य की जनता एलडीएफ सरकार से बदलाव चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा कमजोर हुआ है। वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी यूडीएफ की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि इस बार केरल बदलाव के लिए मतदान करेगा।


चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस संगठनात्मक स्तर पर भी सक्रिय नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व ने संभावित भीतरघात को रोकने के लिए नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू किया है। टिकट वितरण से असंतुष्ट नेताओं को मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि चुनाव के दौरान किसी तरह की आंतरिक कलह से बचा जा सके।


केरल की 140 सीटों में से 124 सामान्य, 14 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महिला मतदाताओं की भूमिका चुनाव परिणाम तय करने में अहम साबित हो सकती है। अब सभी की निगाहें 9 अप्रैल 2026 पर टिकी हैं, जब राज्य की जनता अपने मताधिकार का प्रयोग कर अगली सरकार का फैसला करेगी।

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