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कर्नाटक में CM कुर्सी पर सियासी हलचल? बेंगलुरु में डीके शिवकुमार के कटआउट से तेज हुई अटकलें

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 13 मई
  • 4 मिनट पठन
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भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: बेंगलुरु, 13 मई। कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। बुधवार को बेंगलुरु स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar को “कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री” के रूप में दर्शाने वाले बड़े कटआउट लगाए गए, जिसके बाद राज्य की सियासत में नई बहस छिड़ गई।

हालांकि, डीके शिवकुमार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि राज्य में किसी भी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है और सरकार पूरी तरह स्थिर है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री H. D. Kumaraswamy ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री Siddaramaiah और डीके शिवकुमार के बीच ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) चुनावों को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है।

राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

कांग्रेस कार्यालय के बाहर लगे कटआउट ने बढ़ाई चर्चा

बेंगलुरु में कांग्रेस कार्यालय के बाहर लगाए गए कटआउट में डीके शिवकुमार को भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दबाव बढ़ रहा है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी और मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी प्रकार का संकट नहीं है।

“कोई कुर्सी नहीं डगमगा रही” — डीके शिवकुमार

रायचूर जिले के लिंगासागुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान D. K. Shivakumar ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी हिल रही है।

शिवकुमार ने कहा,

“कर्नाटक में कोई कुर्सी नहीं डगमगा रही है। सभी कुर्सियां स्थिर हैं। मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री क्या देख रहे हैं।”

उनका यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर समय-समय पर अटकलें लगती रही हैं।

जीबीए चुनाव बना नई राजनीतिक बहस का केंद्र

कर्नाटक की राजनीति में फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले पांच नगर निगमों के चुनावों को लेकर हो रही है।

केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता H. D. Kumaraswamy ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चुनाव जल्द कराना चाहते हैं, जबकि डीके शिवकुमार इसके पक्ष में नहीं हैं।

कुमारस्वामी ने दावा किया कि सिद्धारमैया का मानना है कि यदि जीबीए चुनाव समय पर हो जाते हैं तो उनका मुख्यमंत्री पद अगले छह महीनों तक सुरक्षित रहेगा। वहीं, डीके शिवकुमार को आशंका है कि अगर अभी चुनाव हुए तो उनकी मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं।

हालांकि कांग्रेस सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है।

सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की भूमिका

कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त G. S. Sangreshi ने पहले कहा था कि जीबीए के तहत आने वाले पांच नगर निगमों के चुनाव 14 जून से 24 जून के बीच कराए जा सकते हैं।

लेकिन बाद में राज्य चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय जनगणना-2024 और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का हवाला देते हुए चुनाव कराने के लिए 30 सितंबर तक अतिरिक्त समय मांगने हेतु सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन दायर किया।

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 30 जून तक बेंगलुरु स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

राजनीतिक संकेत क्या कहते हैं?

विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस सरकार के भीतर फिलहाल खुला टकराव दिखाई नहीं देता, लेकिन नेतृत्व को लेकर अंदरूनी महत्वाकांक्षाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।

डीके शिवकुमार को संगठन और संसाधन प्रबंधन में मजबूत नेता माना जाता है, जबकि सिद्धारमैया प्रशासनिक अनुभव और जनाधार के कारण पार्टी के केंद्रीय चेहरे बने हुए हैं। ऐसे में स्थानीय निकाय चुनावों का परिणाम भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हालिया घटनाक्रम के बाद कर्नाटक की राजनीति को लेकर कई सवाल चर्चा में हैं—

  • क्या कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा वास्तव में गंभीर है?

  • क्या जीबीए चुनाव मुख्यमंत्री पद की राजनीति को प्रभावित करेंगे?

  • क्या डीके शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बन सकते हैं?

  • क्या सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं?

  • क्या विपक्ष इन अटकलों का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है?

Q&A / FAQ सेक्शन

Q1. बेंगलुरु में किस नेता के कटआउट लगाए गए?

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अगले मुख्यमंत्री के रूप में दर्शाने वाले कटआउट लगाए गए।

Q2. डीके शिवकुमार ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कोई कुर्सी डगमगा नहीं रही है और सरकार स्थिर है।

Q3. जीबीए चुनाव क्या हैं?

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के अंतर्गत आने वाले नगर निगमों के स्थानीय निकाय चुनाव।

Q4. एचडी कुमारस्वामी ने क्या आरोप लगाया?

उन्होंने दावा किया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच जीबीए चुनावों को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है।

Q5. सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया था?

सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जून तक बेंगलुरु स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

निष्कर्ष : कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर उठ रही अटकलें फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित दिखाई देती हैं, लेकिन बेंगलुरु में लगे कटआउट और जीबीए चुनावों को लेकर बढ़ती बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति आने वाले महीनों में और दिलचस्प हो सकती है। स्थानीय निकाय चुनाव केवल नगर प्रशासन का मुद्दा नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें कांग्रेस के अंदर शक्ति संतुलन की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

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Source: डीके शिवकुमार का सार्वजनिक बयान, एचडी कुमारस्वामी की प्रेस प्रतिक्रिया, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय से जुड़ी आधिकारिक जानकारी।

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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