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बेंगलुरु में आमों का महाकुंभ शुरू, रसायन-मुक्त फलों की बढ़ी मांग; निर्यात संकट से कीमतें नरम पड़ने की उम्मीद

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 13
  • 4 min read
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भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: बेंगलुरु, 13 मई। गर्मियों के मौसम के साथ बेंगलुरु में आम प्रेमियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। शहर का बहुप्रतीक्षित “बेंगलुरु मैंगो एंड जैकफ्रूट मेला 2026” शुरू हो चुका है, जहां ताज़े, रसायन-मुक्त और सीधे किसानों से लाए गए आमों की खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस बार मेले को लेकर उत्साह इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के चलते निर्यात में आई गिरावट से घरेलू बाजार में आमों की कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है।

कब्बन पार्क स्थित बैंड स्टैंड और बाल भवन गेट के पास आयोजित यह मेला 8 मई से 17 मई तक चलेगा। सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुलने वाले इस मेले में कर्नाटक समेत देश के विभिन्न हिस्सों की लोकप्रिय आम किस्में उपलब्ध हैं।

किसानों से सीधे खरीद का मौका

मेले में लगभग 50 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां किसान सीधे उपभोक्ताओं को आम बेच रहे हैं। इससे खरीदारों को ताज़े और प्राकृतिक तरीके से पकाए गए आम मिल रहे हैं, वहीं किसानों को बिचौलियों के बिना बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

मेले में उपलब्ध प्रमुख किस्मों में बादामी (कर्नाटक का अल्फांसो), रसपुरी, मल्लिका, सेंधुरा, इमाम पसंद, केसर और सिंधु शामिल हैं। इसके अलावा कुछ स्टॉलों पर रुद्राक्षी और तुबागरे जैसी कटहल की विशेष किस्में भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

सिर्फ आम नहीं, स्वाद का पूरा उत्सव

यह मेला केवल फल खरीदने तक सीमित नहीं है। यहां आम और कटहल से बने कई विशेष व्यंजन भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

आगंतुक आम की आइसक्रीम, कटहल की आइसक्रीम, ताजा आम जूस, जामुन शॉट्स, आंवला शॉट्स, कटहल पापड़ और आम भेल जैसे स्नैक्स का स्वाद ले रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए यह आयोजन गर्मियों के स्वाद और पारंपरिक फलों का अनूठा अनुभव बन गया है।

क्या इस बार सस्ते होंगे आम?

इस वर्ष आम बाजार में सबसे बड़ी चर्चा कीमतों को लेकर हो रही है। व्यापारियों और निर्यातकों के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत से आमों के निर्यात में 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।

विदेशी शिपमेंट में कमी और माल ढुलाई लागत बढ़ने के कारण कई निर्यातक प्रीमियम गुणवत्ता वाले आम विदेश भेजने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। इसका असर घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति के रूप में देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात-योग्य आम भी स्थानीय बाजार में उपलब्ध होने से कुछ लोकप्रिय किस्मों की कीमतों में नरमी आ सकती है। हालांकि पूरी तरह भारी गिरावट की उम्मीद नहीं की जा रही, क्योंकि जैविक और प्राकृतिक रूप से पकाए गए प्रीमियम आमों की उत्पादन लागत अभी भी काफी अधिक है।

प्रमुख आम किस्मों की अनुमानित कीमतें

आम की किस्म अनुमानित कीमत

बादामी (अल्फांसो) ₹100-150 प्रति किलोग्राम

इमाम पसंद ₹300-350 प्रति किलोग्राम

मियाज़ाकी का भारतीय संस्करण ₹2,000-2,500 प्रति किलोग्राम

रत्नागिरी अल्फांसो ₹150-350 प्रति किलोग्राम

सिंधु ₹60-80 प्रति किलोग्राम

केसर और रसपुरी ₹100-150 प्रति किलोग्राम

क्यों खास है यह मेला?

विशेषज्ञों के अनुसार बेंगलुरु का यह वार्षिक मेला सिर्फ व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा जुड़ाव बनाने वाला मंच भी है।

रसायन-मुक्त फलों की बढ़ती मांग के बीच लोग अब प्राकृतिक तरीके से उगाए और पकाए गए फलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि इस बार मेले में भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है।

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हालिया घटनाक्रम के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं—

  • क्या इस बार आमों की कीमतें वास्तव में कम होंगी?

  • क्या निर्यात संकट का फायदा घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा?

  • कौन-सी आम की किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय बनी हुई है?

  • क्या रसायन-मुक्त आम सामान्य बाजार के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित हैं?

  • क्या भविष्य में ऐसे किसान मेले और बड़े स्तर पर आयोजित होंगे?

Q&A / FAQ सेक्शन

Q1. बेंगलुरु मैंगो एंड जैकफ्रूट मेला कब तक चलेगा?

यह मेला 8 मई से 17 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

Q2. मेला कहां आयोजित हो रहा है?

कब्बन पार्क के बैंड स्टैंड और बाल भवन गेट के पास।

Q3. मेले में कौन-कौन से आम मिल रहे हैं?

बादामी, रसपुरी, इमाम पसंद, मल्लिका, सिंधु, केसर और अन्य लोकप्रिय किस्में उपलब्ध हैं।

Q4. क्या इस बार आम सस्ते हो सकते हैं?

निर्यात में कमी के कारण कुछ किस्मों की कीमतों में नरमी की संभावना जताई जा रही है।

Q5. मेले में और क्या आकर्षण हैं?

आम और कटहल से बने विशेष व्यंजन, आइसक्रीम, जूस और पारंपरिक स्नैक्स।

निष्कर्ष : बेंगलुरु का यह आम और कटहल मेला केवल स्वाद का उत्सव नहीं, बल्कि बदलते कृषि बाजार और उपभोक्ता पसंद का भी संकेत है। निर्यात में गिरावट के कारण स्थानीय बाजार में प्रीमियम गुणवत्ता वाले आमों की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिलेंगे। वहीं किसानों के लिए यह मेला सीधे बिक्री का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में अगर मौसम और आपूर्ति संतुलित रही, तो इस बार आम प्रेमियों को स्वाद के साथ कीमतों में भी राहत मिल सकती है।

Keywords: बेंगलुरु आम मेला, रसायन-मुक्त आम, आम की कीमतें, कब्बन पार्क मेला, कर्नाटक आम

Source: किसान बाजार आयोजकों, स्थानीय विक्रेताओं, निर्यात व्यापार से जुड़े सूत्रों और सार्वजनिक बाजार जानकारी पर आधारित।

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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