तेल संकट पर PM मोदी की अपील का समर्थन, “देशहित सबसे पहले”—डॉ. जवरीलाल लूनावत
- धन्ना राम चौधरी

- 11 मई
- 4 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
बेंगलुरु (कर्नाटक), 11 मई 2026। वैश्विक तेल संकट, बढ़ती महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नागरिकों से ईंधन बचत, अनावश्यक विदेश यात्राओं से परहेज और सोने की खरीद सीमित करने की अपील के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक प्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका संघ के महामंत्री डॉ. जवरीलाल लूनावत ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि “देशहित हर नागरिक के लिए सबसे पहले होना चाहिए।”
डॉ. लूनावत ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए ईंधन संरक्षण अब केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि आम लोग पेट्रोल-डीजल के उपयोग में संयम बरतें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें, तो इससे देश की आर्थिक स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच तेल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे आम जनता पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका प्रभाव खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक देखने को मिलता है। ऐसे में ईंधन की बचत देश और समाज दोनों के हित में है।
“छोटी बचत, बड़ा राष्ट्रीय योगदान”
डॉ. लूनावत ने कहा कि अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने, साझा परिवहन अपनाने और जरूरत के अनुसार ही यात्रा करने जैसी आदतें समय की मांग हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां “वर्क फ्रॉम होम”, ऑनलाइन मीटिंग और सार्वजनिक परिवहन जैसे विकल्प अपनाए जाएं।
उन्होंने कहा, “जब देश किसी संकट से गुजरता है तो सरकार के साथ-साथ नागरिकों का सहयोग भी उतना ही आवश्यक होता है। हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह राष्ट्रीय हित में जिम्मेदारी दिखाए।”
सोने की खरीद पर प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए डॉ. लूनावत ने कहा कि यदि परिवार एक वर्ष तक सोने की खरीद टाल दें तो इससे देश की विदेशी मुद्रा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पारिवारिक कार्यक्रमों या उपहारों में सोने के स्थान पर भारतीय मुद्रा या अन्य उपयोगी विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
महिलाओं और परिवारों से सहयोग की अपील
डॉ. लूनावत ने विशेष रूप से महिलाओं और परिवारों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह छोटा त्याग देशहित में महत्वपूर्ण योगदान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही आर्थिक चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में सौर ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना जरूरी होगा ताकि देश की पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग लंबे समय में आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए उपयोगी माना जाता है।
विशेषज्ञों की नजर में क्या है असर?
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि ईंधन की खपत में कमी आती है तो आयात बिल नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। वहीं अनावश्यक विदेश यात्राओं में कमी आने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसी अपीलों का असर नागरिकों की भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर निर्भर करेगा।
आपके मन में उठ रहे सवाल
क्या ईंधन बचत से वास्तव में महंगाई पर असर पड़ सकता है?
क्या सोने की खरीद सीमित करने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा?
क्या आम नागरिक ऊर्जा संकट से निपटने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं?
क्या भारत को अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से निवेश बढ़ाना चाहिए?
क्या सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों की जरूरत है?
Q&A Section
Q1. डॉ. जवरीलाल लूनावत ने किस अपील का समर्थन किया?
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत, सोने की खरीद सीमित करने और अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने की अपील का समर्थन किया।
Q2. उन्होंने ईंधन बचत को क्यों जरूरी बताया?
उनके अनुसार ईंधन संरक्षण से देश की आर्थिक स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
Q3. सोने की खरीद को लेकर क्या सुझाव दिया गया?
उन्होंने कहा कि लोग एक वर्ष तक सोने की खरीद टाल सकते हैं और उपहार के रूप में भारतीय मुद्रा या अन्य विकल्प अपना सकते हैं।
Q4. वैकल्पिक ऊर्जा को लेकर क्या कहा गया?
उन्होंने भविष्य में सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
Q5. आम नागरिकों से क्या अपील की गई?
अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और जरूरत के अनुसार ईंधन उपयोग करने की अपील की गई।
निष्कर्ष: ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन बचत, सीमित उपभोग और वैकल्पिक ऊर्जा की दिशा में सामूहिक प्रयासों की जरूरत लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। डॉ. जवरीलाल लूनावत का बयान इसी व्यापक राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें नागरिक भागीदारी को आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज स्तर पर छोटे-छोटे बदलाव अपनाए जाएं तो उनका असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।
Description: प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका संघ के महामंत्री डॉ. जवरीलाल लूनावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत, सोने की खरीद सीमित करने और विदेश यात्रा कम करने की अपील का समर्थन किया।
Source: प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका संघ एवं जारी बयान से प्राप्त जानकारी।
Keywords: तेल संकट 2026, डॉ जवरीलाल लूनावत, प्रधानमंत्री मोदी अपील, ईंधन बचत, सोने की खरीद
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