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मोदी बोले: ‘सेवा और आध्यात्मिकता ही विकसित भारत की असली ताकत’ — बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग के मंच से युवाओं और समाज को दिया बड़ा संदेश

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 10 मई
  • 4 मिनट पठन
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भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु, 10 मई। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को Art of Living Foundation के 45वें स्थापना समारोह में हिस्सा लेते हुए आध्यात्मिकता, सामाजिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण को भारत के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। बेंगलुरु स्थित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar की मौजूदगी में नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया और संगठन की विभिन्न सामाजिक पहलों की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि “विकसित भारत” का सपना केवल सरकारों से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी, युवाओं की जिम्मेदारी और आध्यात्मिक चेतना से पूरा होगा। कार्यक्रम में हजारों लोगों की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सामाजिक घटना बना दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बेंगलुरु केवल तकनीक और सॉफ्टवेयर की राजधानी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को दुनिया तक पहुंचाने वाला प्रमुख केंद्र भी बन चुका है। उन्होंने योग, ध्यान और प्राणायाम को भारत की प्राचीन विरासत बताते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया इन परंपराओं से प्रेरणा ले रही है।

उन्होंने कहा,

“भारत की विविधता को जोड़ने वाली सबसे बड़ी शक्ति दूसरों के लिए जीने की भावना है। सेवा ही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।”

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि समाज सरकारों से अधिक शक्तिशाली होता है और जब लोग स्वयं राष्ट्र निर्माण में भाग लेते हैं, तभी बड़े परिवर्तन संभव होते हैं।

आर्ट ऑफ लिविंग की पहलों की खुलकर सराहना

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने Art of Living Foundation द्वारा चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियान, ग्रामीण विकास कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी कल्याण और जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सुधार जैसी पहलों को “समग्र विकास का मॉडल” बताया।

उन्होंने कहा कि संगठन सेवा और अध्यात्म को साथ लेकर चल रहा है, जो आधुनिक भारत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से “एक पेड़ मां के नाम” जैसे पर्यावरण अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की अपील की।

युवाओं को दिया बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के युवाओं को विकसित भारत का सबसे बड़ा आधार बताते हुए कहा कि भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो मानसिक रूप से शांत, सामाजिक रूप से संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार होंगे।

उन्होंने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप, स्पेस टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की तेज प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा,

“आध्यात्मिक कल्याण, योग और ध्यान युवाओं को मानसिक संतुलन देते हैं। यही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा।”

राजनीति से ऊपर समाज की शक्ति पर जोर

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भी वे समाजसेवी और आध्यात्मिक संगठनों के बीच आते हैं, तो उनसे राष्ट्र निर्माण में और बड़ी भूमिका निभाने का आग्रह अवश्य करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है और आर्ट ऑफ लिविंग जैसे संगठन इस परिवर्तन के मजबूत संरक्षक बन सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सेवा की भावना ही भारत की असली पहचान है और यही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

क्या हैं इस कार्यक्रम के बड़े संदेश?

  • आध्यात्मिकता और राष्ट्र निर्माण को साथ जोड़ने का प्रयास

  • युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी पर फोकस

  • पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर

  • सेवा आधारित सामाजिक संगठनों की भूमिका को राष्ट्रीय विकास से जोड़ना

  • बेंगलुरु को तकनीक के साथ आध्यात्मिक राजधानी के रूप में प्रस्तुत करना

Fact Check | प्रमुख तथ्य

बिंदु विवरण

कार्यक्रम आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की 45वीं वर्षगांठ

स्थान बेंगलुरु, कर्नाटक

मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रमुख घोषणा ध्यान मंदिर उद्घाटन और सामाजिक पहलों की सराहना

मुख्य विषय आध्यात्मिकता, जनभागीदारी, युवा शक्ति और पर्यावरण संरक्षण

FAQ | लोगों के मन में उठ रहे अहम सवाल

Q1. प्रधानमंत्री मोदी किस कार्यक्रम में शामिल हुए थे?

प्रधानमंत्री मोदी बेंगलुरु में आयोजित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की 45वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए थे।

Q2. कार्यक्रम में क्या उद्घाटन किया गया?

प्रधानमंत्री ने नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया।

Q3. प्रधानमंत्री ने युवाओं को क्या संदेश दिया?

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए मानसिक रूप से शांत, जिम्मेदार और संवेदनशील युवा आवश्यक हैं।

Q4. कार्यक्रम में किन सामाजिक पहलों की चर्चा हुई?

वृक्षारोपण, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी पहलों की चर्चा हुई।

Q5. प्रधानमंत्री ने समाज की भूमिका पर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि समाज सरकारों से अधिक शक्तिशाली है और राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी अनिवार्य है।

निष्कर्ष : बेंगलुरु में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक आध्यात्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि “विकसित भारत” के विजन को समाज, युवाओं और सेवा संगठनों से जोड़ने का एक बड़ा संदेश भी बनकर उभरा। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, सामाजिक चेतना और सामूहिक भागीदारी से तय होगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आध्यात्मिक संस्थाओं को सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की यह रणनीति भविष्य की राजनीति और समाज दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।

Source: प्रधानमंत्री आर्ट ऑफ लिविंग के सार्वजनिक संबोधन एवं कार्यक्रम विवरण, Art of Living Foundation, मीडिया रिपोर्ट्स।

Keywords: प्रधानमंत्री मोदी, आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम, बेंगलुरु समाचार, श्री श्री रवि शंकर, विकसित भारत मिशन

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