उत्तराखंड में खत्म हुआ मदरसा बोर्ड, ‘धामी मॉडल’ की देशभर में चर्चा
- धन्नाराम चौधरी

- 4 जुल॰
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एक राष्ट्र-एक शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, अब सभी अल्पसंख्यकों के लिए समान शिक्षा व्यवस्था
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) देहरादून | 04 जुलाई, 2026 में मुख्यमंत्री की सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। राज्य सरकार ने एक जुलाई से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम-2016 और गैर सरकारी अरबी-फारसी मदरसा विनियम-2019 को निरस्त कर नई शिक्षा व्यवस्था लागू की है। इसे “एक राष्ट्र-एक शिक्षा” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड की जगह अब “उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण” गठित किया है। इस नए मॉडल के तहत अब केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं बल्कि राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों — मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी — को समान शिक्षा अधिकार और एक जैसी नियामक व्यवस्था के दायरे में लाया गया है।
धामी सरकार के इस फैसले को समर्थक सामाजिक समरसता, आधुनिक शिक्षा और समान अवसर की दिशा में बड़ा सुधार बता रहे हैं। वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे “धामी मॉडल” के रूप में चर्चा मिल रही है। सरकार का दावा है कि अब राज्य के 456 मदरसों को शिक्षा विभाग और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्ध होना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत मदरसों में अब गणित, विज्ञान, कंप्यूटर, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों की पढ़ाई भी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा से जोड़ना और उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक तथा प्रशासनिक अधिकारी बनने के अवसर उपलब्ध कराना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब किसी एक वर्ग के लिए अलग और समानांतर शिक्षा व्यवस्था नहीं चलेगी। नई नीति में सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को समान नियमों के तहत काम करना होगा। इसके साथ ही संस्थानों की मान्यता अब सीमित अवधि और शर्तों के आधार पर दी जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड का यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा सुधारों की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। समर्थकों के अनुसार इससे मुख्यधारा की शिक्षा को मजबूती मिलेगी, जबकि आलोचक इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से भी देख रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा व्यवस्था लागू करना है।
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