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ईमानदार नौकरशाही को मिले सच्चा सम्मान

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 24
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

देश ने हाल ही में सिविल सेवा दिवस मनाया, जहां औपचारिक समारोहों में अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह परंपरा न केवल प्रशासनिक सेवाओं के महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को प्रोत्साहित करने का भी एक प्रयास है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या ऐसे सम्मान वास्तव में पूरी नौकरशाही को प्रेरित कर पा रहे हैं?


वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है। प्रशासनिक तंत्र में बढ़ते भ्रष्टाचार, जवाबदेही की कमी और कार्यकुशलता में गिरावट ने आम नागरिकों का विश्वास कमजोर किया है। छोटे स्तर से लेकर बड़े पदों तक रिश्वतखोरी की शिकायतें आम हो चुकी हैं। निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों में निविदाओं में गड़बड़ी कर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई अक्सर सीमित या प्रतीकात्मक ही रहती है। जमीनी स्तर पर स्थिति और भी गंभीर है। पटवारी, तहसीलदार और निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों के कामकाज को लेकर आम जनता में असंतोष साफ दिखाई देता है। नागरिकों के बीच यह धारणा बन चुकी है कि बिना रिश्वत दिए सरकारी काम कराना लगभग असंभव है। ऐसे माहौल में विकसित भारत-2047 का सपना अधूरा ही प्रतीत होता है। नैतिक मूल्यों में गिरावट का एक चिंताजनक उदाहरण उस समय सामने आया जब एक प्रशिक्षण सत्र में एक कनिष्ठ अधिकारी ने वरिष्ठ से यह पूछ लिया कि सेवा के दौरान “पैसा कमाने के तरीके” क्यों नहीं बताए गए। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था में गहराते नैतिक संकट की ओर स्पष्ट संकेत देती है।


हाल ही में मध्यप्रदेश के शिवपुरी में एक युवा पुलिस अधिकारी को एक जनप्रतिनिधि द्वारा धमकाने की घटना ने भी इस समस्या को उजागर किया। यह न केवल प्रशासनिक स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों के मनोबल को भी कमजोर करता है। यह सत्य है कि लोक सेवकों को जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह होना चाहिए, लेकिन समाज और जनप्रतिनिधियों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे ईमानदार अधिकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। भ्रष्टाचारियों और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन जो अधिकारी नियमों के तहत निष्पक्षता से काम कर रहे हैं, उन्हें अनावश्यक दबाव या धमकी का सामना नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि नौकरशाही लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ है। यदि यह तंत्र कमजोर या भ्रष्ट होगा, तो शासन व्यवस्था प्रभावित होना तय है। ऐसे में जरूरी है कि ईमानदार और निडर अधिकारियों को न केवल सम्मानित किया जाए, बल्कि उन्हें सुरक्षा और स्वतंत्रता भी दी जाए ताकि वे बिना भय के अपना कर्तव्य निभा सकें। सिविल सेवा दिवस तभी सार्थक होगा जब यह केवल औपचारिकता न रहकर एक वास्तविक प्रेरणा का स्रोत बने। जरूरत है कि सरकार, समाज और प्रशासन मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां ईमानदारी को मजबूती मिले और भ्रष्टाचार को सख्ती से समाप्त किया जा सके। तभी एक सशक्त, पारदर्शी और जनहितैषी प्रशासनिक व्यवस्था का निर्माण संभव हो पाएगा।


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