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आखिर क्यों बढ़ीं भजनलाल सरकार की मुश्किलें?

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • Jul 14
  • 2 min read
Man in a colorful turban speaks at microphones, wearing a white shirt and patterned scarf, against a gold-patterned backdrop.
प्रसूताओं की मौत, पेपर लीक, पंचायत चुनाव और चर्चित डेथ केसों ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जयपुर (राजस्थान) | 14 जुलाई, 2026। राजस्थान की राजनीति में इन दिनों हलचल अपने चरम पर है। Rajasthan News में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार लगातार कई संवेदनशील मामलों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। कोटा, बीकानेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के मामलों से लेकर जयपुर के चर्चित अमायरा और वंशिका डेथ केस, पंचायत चुनावों में देरी तथा पेपर लीक माफिया सुरेश ढाका के पिता को कथित रूप से बजरी खनन का ठेका मिलने के मुद्दे ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस इन सभी मामलों को जनता के बीच प्रमुख मुद्दा बना रही है, जबकि सरकार का कहना है कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है।


भजनलाल सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत पेपर लीक माफियाओं पर सख्त कार्रवाई, महिला सुरक्षा, बुलडोजर अभियान, अतिक्रमण हटाने और प्रशासनिक सुधार जैसे फैसलों के साथ की थी। सरकार ने पेपर लीक की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया और कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। साथ ही ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) को आगे बढ़ाने, मध्य प्रदेश के साथ समझौता करने तथा यमुना जल समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए। इन फैसलों से सरकार ने विकास और प्रशासनिक सक्रियता की मजबूत छवि बनाई।


हालांकि पिछले डेढ़ महीने में हालात तेजी से बदले हैं। विभिन्न जिलों में प्रसूताओं की मौत के मामलों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। चिकित्सा मंत्री के बयानों ने भी विवाद को और बढ़ा दिया। इंजेक्शन और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी जांच की मांग उठी है।


इसी बीच पेपर लीक के आरोपी सुरेश ढाका के पिता को बजरी खनन का ठेका मिलने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया। विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि सरकार की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया। पंचायत चुनावों में देरी और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर भी कांग्रेस लगातार सरकार पर हमला बोल रही है।


जयपुर के अमायरा डेथ केस में जांच पर उठे सवाल और वंशिका डेथ केस में परिजनों द्वारा न्याय की मांग ने भी सरकार की जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन मामलों का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो आगामी राजनीतिक माहौल पर इसका असर पड़ सकता है। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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