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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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UNSC में भारत की स्थायी सीट की दावेदारी को रूस का समर्थन

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
27 सित॰
2 मिनट पठन
UNSC कक्ष में मोदी-पुतिन हाथ मिलाते, भारत की स्थायी सदस्यता पर हिंदी शीर्षक, झंडे और सीट-नाम दिखते हैं।

भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की लंबे समय से चली आ रही दावेदारी को रूस का समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन किया। उन्होंने परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की वकालत की।


रूस ने भारत और ब्राजील की उम्मीदवारी का समर्थन किया


26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के दौरान लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण के अधिक देशों को प्रतिनिधित्व देना होना चाहिए। रूस ने विशेष रूप से भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया। लावरोव ने साथ ही पश्चिमी देशों के लिए अतिरिक्त स्थायी सीटें देने का विरोध किया और जर्मनी तथा जापान का विशेष रूप से उल्लेख किया। रूस का रुख यह है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।


सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य, पांच स्थायी


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में 15 सदस्य हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—हैं, जबकि 10 गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार है। सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना को बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से सुधार की प्रक्रिया चल रही है।


सुधार की प्रक्रिया अभी जारी


संयुक्त राष्ट्र महासभा सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और सदस्यता बढ़ाने के मुद्दे पर अंतर-सरकारी वार्ता जारी रखे हुए है। महासभा ने 81वें सत्र में भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय किया है। सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव केवल किसी एक देश के समर्थन से संभव नहीं है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया के तहत व्यापक सदस्य-समर्थन की आवश्यकता होती है।


भारत के लिए अहम कूटनीतिक मुद्दा


भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को मौजूदा वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधिक बनाने की मांग करता रहा है। भारत की दावेदारी के समर्थन में अलग-अलग देशों और समूहों की ओर से समय-समय पर बयान सामने आते रहे हैं। रूस का ताजा समर्थन ऐसे समय आया है जब सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। इससे पहले सितंबर में हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य वाले वीसग्राद समूह ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया था।


व्यापक सहमति से ही आगे बढ़ेगा प्रस्ताव


भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को रूस सहित कई देशों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन सुरक्षा परिषद के विस्तार का प्रश्न व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति से जुड़ा है। स्थायी सदस्यों की संख्या, नए सदस्यों के अधिकार और वीटो व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अलग-अलग देशों के रुख में अंतर बना हुआ है। इसलिए रूस का समर्थन भारत की दावेदारी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान जरूर है, लेकिन इससे सुरक्षा परिषद की संरचना में तत्काल बदलाव नहीं होता। सुधार प्रक्रिया में आगे की वार्ताएं और सदस्य देशों के बीच सहमति इस मुद्दे की दिशा तय करेंगी।

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