कलश स्थापना में उमड़ा आस्था का सागर
- धन्ना राम चौधरी

- 3 जून
- 3 मिनट पठन
बूल में जाम्भाणी हरिकथा महोत्सव का भव्य समापन, संतों के सान्निध्य में गूंजे धर्म और संस्कार के संदेश

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम
डेटलाइन: धोरीमन्ना (बाड़मेर), 03 जून 2026। धोरीमन्ना उपखंड की ग्राम पंचायत बूल में स्थित श्री गुरु जंभेश्वर भगवान मंदिर में आयोजित जाम्भाणी हरिकथा महोत्सव एवं कलश स्थापना समारोह का भव्य समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। समस्त विश्नोई समाज ग्राम पंचायत बूल के तत्वावधान में आयोजित इस विशाल धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
कलश स्थापना के पावन अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। भगवान विष्णु एवं गुरु जंभेश्वर भगवान के जयघोषों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
संतों के सान्निध्य में हुआ कलश स्थापना समारोह
हरिकथा समापन समारोह एवं मंदिर कलश स्थापना कार्यक्रम में स्वामी भागीरथ जी शास्त्री, आचार्य बालाचार्य जी महाराज, सुरजन दास जी महाराज, रामानंद जी महाराज तथा सुप्रसिद्ध कथा वाचिका डॉ. मधु बिश्नोई की विशेष उपस्थिति रही।
वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच मंदिर शिखर पर कलश स्थापना एवं ध्वजारोहण संपन्न हुआ। जैसे ही मंदिर शिखर पर ध्वजा फहराई गई, श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया।

धर्म, संस्कार और प्रकृति संरक्षण का संदेश
अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में संत-महात्माओं ने धर्म, मानवता, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु जंभेश्वर भगवान के सिद्धांत आज भी मानव समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
संतों ने लोगों से प्रकृति संरक्षण, जीव दया, सदाचार और नशामुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम भी बनते हैं।
भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु
हरिकथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। कथा वाचिका डॉ. मधु बिश्नोई ने गुरु जंभेश्वर भगवान के जीवन, उनके उपदेशों और विश्नोई समाज की महान परंपराओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालुओं की आंखों में श्रद्धा और चेहरे पर भक्ति की झलक स्पष्ट दिखाई दी। कई श्रद्धालु पूरे समय कथा स्थल पर उपस्थित रहे और धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
जनप्रतिनिधियों और समाज के गणमान्यों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में मालाणी धर्मशाला के अध्यक्ष नारायण गोदारा, मालाणी भोजनशाला के अध्यक्ष रामगोपाल जांगू, भाजपा नेता जयकिशन भादू, धोरीमन्ना नगर पालिका चेयरमैन मनोहर तेतरवाल, पूर्व सरपंच सदराम खीचड़, पंचायत समिति सदस्य वीरेंद्र बोला, भजनलाल जांगू, महेश कड़वासरा, पूनमाराम भादू, किशनाराम डारा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों, सेवा संस्थाओं एवं ग्रामवासियों ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
सामाजिक समरसता का बना केंद्र
आयोजन समिति ने बाहर से पधारे संत-महात्माओं, अतिथियों और समाज के वरिष्ठजनों का सम्मान किया। कार्यक्रम में सभी वर्गों और आयु समूहों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
आयोजकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में भाईचारा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य भी करते हैं।
सेवा, समर्पण और सहयोग का उदाहरण
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में ग्रामवासियों, सेवक दल, युवाओं और समाजबंधुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भोजन व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, सुरक्षा और अनुशासन सहित सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की गईं।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक मंगलकामना, आशीर्वचन और समाज के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना के साथ हुआ।
News Source: समस्त विश्नोई समाज ग्राम पंचायत बूल आयोजन समिति एवं स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी
Fact Box
आयोजन: जाम्भाणी हरिकथा महोत्सव एवं कलश स्थापना
स्थान: श्री गुरु जंभेश्वर भगवान मंदिर, बूल
आयोजक: समस्त विश्नोई समाज ग्राम पंचायत बूल
विशेष आकर्षण: कलश स्थापना, ध्वजारोहण एवं हरिकथा
मुख्य संदेश: धर्म, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा
आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?FAQ
Q1. कार्यक्रम का आयोजन कहां हुआ?
धोरीमन्ना उपखंड की ग्राम पंचायत बूल स्थित श्री गुरु जंभेश्वर भगवान मंदिर में।
Q2. मुख्य आकर्षण क्या रहा?
मंदिर शिखर पर कलश स्थापना, ध्वजारोहण एवं जाम्भाणी हरिकथा महोत्सव।
Q3. कथा में किसने प्रवचन दिए?
स्वामी भागीरथ जी शास्त्री, आचार्य बालाचार्य जी महाराज, सुरजन दास जी महाराज, रामानंद जी महाराज तथा डॉ. मधु बिश्नोई ने।
Q4. संतों ने क्या संदेश दिया?
धर्म, संस्कार, मानव सेवा, प्रकृति संरक्षण और सदाचार का संदेश दिया।
Q5. आयोजन का उद्देश्य क्या था?
धार्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और गुरु जंभेश्वर भगवान के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार।
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