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पुल में गैप, 120KM लंबा सफर! गोपालगंज-बेतिया महासेतु पर भारी वाहनों की एंट्री बंद

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Jun 7
  • 3 min read

गंडक नदी पर बने 550 करोड़ के महासेतु में तकनीकी खामी, डुमरिया घाट पुल पर बढ़ा दबाव; यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों की बढ़ी मुश्किलें


गोपालगंज-बेतिया महासेतु के स्पैन में गैप मिलने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। गोपालगंज-बेतिया जादोपुर-मंगलपुर महासेतु का प्रतिनिधिक दृश्य|
गोपालगंज-बेतिया महासेतु के स्पैन में गैप मिलने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। गोपालगंज-बेतिया जादोपुर-मंगलपुर महासेतु का प्रतिनिधिक दृश्य|

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन | 07 जून 2026| गोपालगंज| बिहार में बुनियादी ढांचे को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गोपालगंज और पश्चिम चंपारण को जोड़ने वाले जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में तकनीकी खामी सामने आने के बाद प्रशासन ने भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। पुल के स्पैन में 7 से 9 इंच तक का गैप मिलने के बाद यह निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया गया है।

गंडक नदी पर बना यह महासेतु क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है। पुल बंद होने का सबसे बड़ा असर मालवाहक वाहनों और लंबी दूरी के परिवहन पर पड़ा है। अब पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और बगहा की ओर जाने वाले भारी वाहनों को डुमरिया घाट पुल के रास्ते भेजा जा रहा है, जिससे लगभग 120 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय, ईंधन और परिवहन लागत तीनों में बढ़ोतरी हो रही है।

करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस महासेतु का उद्घाटन वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया था। इस पुल के बनने से दियारा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को बड़ी राहत मिली थी और आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान हो गया था। लेकिन उद्घाटन के दस वर्ष पूरे होने से पहले ही पुल में तकनीकी समस्या सामने आने से निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

पुल में दरार जैसी स्थिति की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने मौके का निरीक्षण किया और तकनीकी टीमों से रिपोर्ट मांगी। प्रशासन ने पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी है।

डीएम के अनुसार पुल के स्पैन में गैप आने की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों की टीम अब इसकी विस्तृत तकनीकी जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत और सुरक्षा उपायों पर निर्णय लिया जाएगा। तब तक भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से ही गुजरना होगा।

इस बीच कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में एक युवक पुल के स्पैन में बने गैप को ईंट की सहायता से दिखाता नजर आ रहा था। इसी दौरान उसका मोबाइल फोन गैप में गिर गया था। वीडियो वायरल होने के बाद आम लोगों में पुल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि पुल बंद होने से न केवल यात्रा लंबी हो गई है बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण पुलों की नियमित तकनीकी जांच और रखरखाव अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

Fact Box

पुल का नाम: जादोपुर-मंगलपुर महासेतु

स्थान: गोपालगंज – पश्चिम चंपारण

नदी: गंडक नदी

निर्माण लागत: लगभग 550 करोड़ रुपये

तकनीकी खामी: स्पैन में 7-9 इंच का गैप

प्रभाव: भारी वाहनों का परिचालन बंद

वैकल्पिक मार्ग: डुमरिया घाट पुल

अतिरिक्त दूरी: लगभग 120 किलोमीटर

FAQ Section

Q1. महासेतु पर भारी वाहनों की आवाजाही क्यों रोकी गई?

पुल के स्पैन में 7 से 9 इंच का गैप मिलने के बाद सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया।

Q2. अब भारी वाहन किस मार्ग से गुजरेंगे?

भारी वाहनों को डुमरिया घाट पुल के रास्ते भेजा जा रहा है।

Q3. यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों पर क्या असर पड़ा है?

उन्हें लगभग 120 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

Q4. पुल का उद्घाटन कब हुआ था?

वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया था।

निष्कर्ष: गोपालगंज-बेतिया महासेतु में सामने आई तकनीकी खामी ने बिहार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारी वाहनों पर रोक लगाई है, लेकिन स्थायी समाधान और समयबद्ध मरम्मत अब सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

News Source: जिला प्रशासन गोपालगंज, स्थानीय प्रशासनिक जानकारी एवं मीडिया रिपोर्ट्स।

अब आपकी बारी!

  • क्या महत्वपूर्ण पुलों की नियमित तकनीकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए?

  • क्या निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए?

इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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