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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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अभिज्ञान ऐप लॉन्च: 35 सेकेंड में अपराधी की पूरी कुंडली सामने आएगी

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
20 जून
3 मिनट पठन

अमित शाह का बड़ा ऐलान, अब फिंगरप्रिंट से सड़क पर ही होगी अपराधियों की पहचान


गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अभिज्ञान ऐप लॉन्च करते हुए सम्मेलन का दृश्य
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अभिज्ञान ऐप लॉन्च करते हुए सम्मेलन का दृश्य

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली | 20 जून, 2026| देश की पुलिस व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली में बड़ा तकनीकी बदलाव आने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 के दौरान ‘अभिज्ञान’ ऐप लॉन्च किया, जिसके जरिए अब किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान केवल फिंगरप्रिंट स्कैन से महज 35 सेकेंड में की जा सकेगी। यह हाईटेक ऐप नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा विकसित किया गया है और इसे राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) से जोड़ा गया है। माना जा रहा है कि यह तकनीक देश की पुलिसिंग और अपराध जांच प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

अभिज्ञान ऐप के लॉन्च के साथ ही देशभर की पुलिस और जांच एजेंसियों को जल्द ही पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर से लैस किया जाएगा। इससे सड़क पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी भी मौके पर ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान कर सकेंगे। यदि व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद होगा तो उसका पूरा क्राइम डेटा 35 सेकेंड के भीतर स्मार्टफोन स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करेगी और अपराध नियंत्रण में तेजी लाएगी। उन्होंने बताया कि NAFIS प्लेटफॉर्म में फिलहाल 1.30 करोड़ आरोपियों, दोषियों, संदिग्ध अपराधियों और जेल में बंद कैदियों के फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड मौजूद हैं। अधिकारियों के अनुसार यह डेटा आपराधिक प्रक्रिया पहचान कानून 2022 के तहत एकत्र किया गया है।

सम्मेलन में दी गई जानकारी के अनुसार फिलहाल देश में 1556 पुलिस वर्क स्टेशनों पर फिंगरप्रिंट जांच सुविधा उपलब्ध है। आने वाले समय में इसे और विस्तारित किया जाएगा ताकि हर स्तर पर पुलिस को तकनीकी सहायता मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अपराधियों की पहचान में लगने वाला समय काफी कम होगा और जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अपराध दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पूरी न्यायिक प्रक्रिया को तीन वर्षों के भीतर पूरा करना है। इसके लिए गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के साथ मिलकर व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए सायंकालीन अदालतों की स्थापना और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर काम चल रहा है। शाह ने स्पष्ट कहा कि अब न्याय मिलने में देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार तकनीक और न्याय व्यवस्था दोनों को आधुनिक बनाकर आम जनता को त्वरित न्याय देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

Fact Box

- ऐप का नाम: अभिज्ञान (Abhigyan App)

- लॉन्चकर्ता: गृह मंत्री अमित शाह

- प्लेटफॉर्म: NAFIS

- रिकॉर्ड डेटा: 1.30 करोड़ से अधिक फिंगरप्रिंट

- पहचान समय: 35 सेकेंड

- उपयोग: पुलिस एवं जांच एजेंसियां

- उद्देश्य: तेज अपराध पहचान और स्मार्ट पुलिसिंग

FAQ Section

प्रश्न 1: अभिज्ञान ऐप क्या है?

उत्तर: यह NCRB द्वारा विकसित एक हाईटेक ऐप है जो फिंगरप्रिंट के जरिए अपराधियों की पहचान करता है।

प्रश्न 2: ऐप कितने समय में अपराधी की जानकारी देगा?

उत्तर: महज 35 सेकेंड में पूरी जानकारी सामने आ जाएगी।

प्रश्न 3: यह ऐप किस सिस्टम से जुड़ा है?

उत्तर: यह राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) से जुड़ा है।

प्रश्न 4: इसमें कितने लोगों का डेटा मौजूद है?

उत्तर: लगभग 1.30 करोड़ आरोपियों और संदिग्धों का फिंगरप्रिंट डेटा उपलब्ध है।

प्रश्न 5: सरकार का न्यायिक लक्ष्य क्या है?

उत्तर: अपराध दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पूरी प्रक्रिया तीन साल में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

निष्कर्ष: अभिज्ञान ऐप का लॉन्च भारत की पुलिसिंग और अपराध जांच प्रणाली में डिजिटल क्रांति की शुरुआत माना जा रहा है। फिंगरप्रिंट आधारित यह तकनीक अपराधियों की पहचान को तेज और सटीक बनाएगी। साथ ही सरकार का त्वरित न्याय प्रणाली पर जोर यह संकेत देता है कि आने वाले समय में देश की न्यायिक व्यवस्था अधिक आधुनिक और प्रभावी हो सकती है।

News Source: गृह मंत्रालय, एनसीआरबी एवं 26वां अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026

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