कांग्रेस में विलय की अटकलों से गरमाई राजनीति, ममता-पवार पर बढ़ी चर्चा
- धन्ना राम चौधरी

- 12 जून
- 4 मिनट पठन
गहलोत, नाना पटोले और संजय राउत के बयानों से तेज हुई ‘महाविलय’ की चर्चा, सुप्रिया सुले ने भी दिए संकेत

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली | 12 जून 2026| देश की राजनीति में एक बार फिर बड़े ‘महाविलय’ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती बगावत के बीच अब ममता बनर्जी और शरद पवार की पार्टियों के कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के नेताओं के लगातार आ रहे बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
इंडिया ब्लॉक की हालिया बैठक के बाद इस चर्चा को और बल मिला जब टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी दिल्ली में रुके रहे। इसके बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान दिया कि कांग्रेस से अलग होकर बने सभी क्षेत्रीय दलों को फिर से कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए और राहुल गांधी को पूरे दिल से नेता स्वीकार करना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले और शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के बयानों की हो रही है। नाना पटोले ने साफ कहा कि शरद पवार और ममता banerjee कांग्रेस के साथ आने की मानसिकता बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देश और संविधान बचाने के लिए समविचारी दलों का एकजुट होना जरूरी हो गया है।
पटोले ने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मजबूत विपक्ष खड़ा करने के लिए वोटों का बंटवारा रोकना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों में अब कांग्रेस के साथ आने का भाव दिखाई देने लगा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस की ओर से किसी पार्टी को आधिकारिक विलय प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
उधर, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस संभावित ‘महाविलय’ में शरद पवार की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से अलग होकर बनी छोटी पार्टियों को दोबारा कांग्रेस में लाने की पहल शरद पवार को करनी चाहिए। राउत के मुताबिक, अगर कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े सभी दल एक मंच पर आ जाते हैं तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
इस बीच एनसीपी (SP) सांसद सुप्रिया सुले का बयान भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया। कांग्रेस और टीएमसी के संभावित विलय पर उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा, “पहले बारिश तो होने दो, फिर देखेंगे छतरी लेनी है या रेनकोट।” हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि उनकी विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के भीतर 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर नई रणनीति तैयार हो रही है। भाजपा के लगातार मजबूत होते जनाधार के बीच विपक्ष अब एक बड़े राजनीतिक गठबंधन या विलय के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।
Fact Box
- प्रमुख चर्चा: TMC और NCP (SP) का कांग्रेस में संभावित विलय
- बड़ा बयान: अशोक गहलोत, नाना पटोले और संजय राउत
- प्रमुख नेता: ममता बनर्जी, शरद पवार, राहुल गांधी
- मुद्दा: विपक्षी एकजुटता और वोट बंटवारा रोकना
- राजनीतिक लक्ष्य: भाजपा के खिलाफ मजबूत गठबंधन
- चर्चा का केंद्र: इंडिया ब्लॉक बैठक के बाद बढ़ी अटकलें
FAQ Section
Q1. कांग्रेस में विलय की चर्चा क्यों तेज हुई?
इंडिया ब्लॉक बैठक और विपक्षी नेताओं के बयानों के बाद यह चर्चा तेज हुई है।
Q2. नाना पटोले ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि शरद पवार और ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ आने की मानसिकता बना रहे हैं।
Q3. संजय राउत ने किसे जिम्मेदारी लेने की बात कही?
उन्होंने शरद पवार को छोटी पार्टियों का कांग्रेस में विलय कराने की पहल करने की सलाह दी।
Q4. सुप्रिया सुले ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने कहा, “पहले बारिश तो होने दो, फिर देखेंगे छतरी लेनी है या रेनकोट।”
निष्कर्ष: विपक्षी राजनीति में उठ रही ‘महाविलय’ की यह चर्चा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल सकती है। कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी (SP) जैसे दलों के नेताओं के लगातार आ रहे बयान इस बात के संकेत दे रहे हैं कि भाजपा के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक समीकरण की जमीन तैयार हो रही है। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक विलय की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलचल ने सियासी माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया है।
News Source: इंडिया ब्लॉक बैठक से जुड़े राजनीतिक बयान, कांग्रेस नेताओं के आधिकारिक बयान, मीडिया इंटरैक्शन में नाना पटोले, संजय राउत और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाएं
आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?
क्या विपक्षी दलों का कांग्रेस में विलय भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनौती बन सकता है? क्या ममता बनर्जी और शरद पवार भविष्य में कांग्रेस के साथ एक मंच पर आ सकते हैं?
अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।
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