2027 चुनाव में सहयोगियों को ज्यादा सीटें दे सकती है BJP, तैयार हो रहा नया फॉर्मूला
- धन्ना राम चौधरी

- 12 जून
- 4 मिनट पठन
अपना दल, निषाद पार्टी, सुभासपा और रालोद को 2-3 अतिरिक्त सीटें देने पर मंथन, NDA में सीट शेयरिंग को लेकर तेज हुई हलचल

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली | 12 जून 2026| उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से बड़ा चुनावी गणित तैयार करना शुरू कर दिया है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार NDA के प्रमुख सहयोगी दलों को पिछली बार के मुकाबले 2 से 3 सीटें ज्यादा देने पर गंभीर मंथन चल रहा है। बीजेपी का मकसद सहयोगियों को साथ लेकर मजबूत सामाजिक समीकरण बनाना और किसी भी प्रकार की नाराजगी से बचना है।
दिल्ली में इन दिनों NDA के कई सहयोगी दलों के नेता सक्रिय हैं। केंद्रीय नेतृत्व और बीजेपी संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकों में सीट शेयरिंग, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चर्चा हो रही है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी इस बार सिर्फ सीटों की संख्या नहीं बल्कि जीतने की क्षमता और वोट ट्रांसफर की ताकत को भी आधार बना रही है।
2022 विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन इस बार सीट बंटवारे का बड़ा आधार माना जा रहा है। पिछले चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) को 17 सीटें मिली थीं, जिनमें से पार्टी ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। निषाद पार्टी ने 10 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 सीटें जीती थीं। वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी उस समय समाजवादी पार्टी गठबंधन में थी और उसने 19 सीटों में से 6 सीटें जीती थीं। अब सुभासपा बीजेपी गठबंधन का हिस्सा है और ज्यादा हिस्सेदारी चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इस बार अपना दल, निषाद पार्टी और सुभासपा को पिछली बार से 2-3 सीटें ज्यादा दे सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को भी सम्मानजनक सीटें देने पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि बीजेपी जाट, कुर्मी, निषाद और राजभर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए सहयोगियों को राजनीतिक महत्व देना चाहती है।
बीजेपी की रणनीति का एक अहम हिस्सा कुछ सहयोगी दलों के नेताओं को कमल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाना भी हो सकता है। पार्टी का मानना है कि कई सीटों पर बीजेपी का चुनाव चिन्ह उम्मीदवार की जीत की संभावना को बढ़ा देता है। इससे गठबंधन का वोट बैंक एकजुट रखने में भी मदद मिल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2027 का चुनाव बीजेपी के लिए सिर्फ सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों को संतुलित बनाए रखने की बड़ी चुनौती भी है। पूर्वांचल में अपना दल और सुभासपा की मजबूत पकड़ मानी जा रही है, जबकि गोरखपुर और बस्ती मंडल में निषाद पार्टी की भूमिका अहम हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की दावेदारी को भी बीजेपी नजरअंदाज नहीं करना चाहती।
फिलहाल बीजेपी नेतृत्व किसी भी सहयोगी दल को नाराज करने के मूड में नहीं दिख रहा है। लोकसभा चुनाव के अनुभवों को देखते हुए पार्टी मजबूत NDA के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। यही वजह है कि सीट शेयरिंग में लचीलापन और सहयोगियों को सम्मान देने की रणनीति अपनाई जा रही है।
Fact Box
- चुनाव: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027
- गठबंधन: NDA
- प्रमुख सहयोगी: अपना दल, निषाद पार्टी, सुभासपा, रालोद
- संभावित फॉर्मूला: 2-3 अतिरिक्त सीटें
- रणनीति: सामाजिक समीकरण मजबूत करना
- फोकस क्षेत्र: पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी
- मुख्य उद्देश्य: गठबंधन में नाराजगी रोकना
FAQ Section
Q1. बीजेपी किसे ज्यादा सीटें देने पर विचार कर रही है?
अपना दल, निषाद पार्टी, सुभासपा और रालोद को अतिरिक्त सीटें देने पर चर्चा चल रही है।
Q2. सीट बंटवारे का आधार क्या होगा?
जीतने की क्षमता, जातीय समीकरण और पिछले चुनाव का प्रदर्शन प्रमुख आधार होंगे।
Q3. क्या सहयोगी दल बीजेपी के चिन्ह पर चुनाव लड़ सकते हैं?
सूत्रों के अनुसार कुछ सहयोगी उम्मीदवारों को कमल के चिन्ह पर चुनाव लड़ाया जा सकता है।
Q4. बीजेपी के लिए 2027 चुनाव कितना अहम है?
यह चुनाव सत्ता के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों को मजबूत बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले बीजेपी गठबंधन राजनीति को बेहद सावधानी से साधने में जुटी है। सहयोगी दलों को अतिरिक्त सीटें देने और राजनीतिक सम्मान बनाए रखने की रणनीति साफ संकेत दे रही है कि बीजेपी इस बार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। आने वाले महीनों में सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
News Source:बीजेपी सूत्र, NDA सहयोगी दलों के नेताओं की बैठकों से जुड़ी जानकारी, राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रियाएं
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क्या बीजेपी का नया सीट शेयरिंग फॉर्मूला NDA को और मजबूत बनाएगा?
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