10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने पर जिला समिति की मंजूरी अनिवार्य
- धन्ना राम चौधरी

- 7 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
रांची। निजी विद्यालयों में मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने और अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से रांची जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम, 2017 के तहत जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक समाहरणालय स्थित एनआईसी सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य शुल्क निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाना रहा।
बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, निजी विद्यालयों के प्रतिनिधि और अभिभावक सदस्य मौजूद रहे। अधिकारियों ने समिति के गठन को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण
समिति ने स्पष्ट किया कि सभी निजी विद्यालय अपनी आंतरिक शुल्क समिति की सहमति से अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। यदि कोई विद्यालय इससे अधिक वृद्धि करना चाहता है, तो उसे जिला स्तरीय समिति से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, विद्यालयों को पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों की कक्षावार फीस का विस्तृत ब्योरा और सत्र 2026-27 की प्रस्तावित शुल्क सूची समिति के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
पारदर्शिता और पीटीए गठन अनिवार्य
प्रत्येक विद्यालय में शुल्क समिति और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। इन समितियों से जुड़ी सभी जानकारियां विद्यालय की वेबसाइट और सूचना पट्ट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी, ताकि अभिभावकों की भागीदारी और निगरानी सुनिश्चित हो सके।
किताबों और यूनिफॉर्म पर भी नियम
विद्यालयों को कक्षावार पुस्तकों की कीमत की जानकारी देना अनिवार्य होगा। सीबीएसई से संबद्ध स्कूल एनसीईआरटी पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य किताबें अनिवार्य नहीं कर सकेंगे। वहीं, यूनिफॉर्म में बदलाव कम से कम पांच वर्षों के अंतराल पर ही किया जाएगा और अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से खरीदारी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। परिवहन शुल्क वृद्धि भी निर्धारित मानकों के तहत ही मान्य होगी।
छात्र हित सर्वोपरि
समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा और परीक्षा के नाम पर अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा। साथ ही, प्रमोशन के लिए दोबारा नामांकन शुल्क लेने पर रोक रहेगी। आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें वंचित वर्ग के छात्रों के लिए अनिवार्य रूप से भरी जाएंगी।
शिकायत पर त्वरित कार्रवाई
अभिभावक अपनी शिकायत समाहरणालय के कक्ष संख्या 105 में या “अबुआ साथी” व्हाट्सएप नंबर 9430328080 पर दर्ज करा सकते हैं। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर 50 हजार से 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर मामलों में विद्यालय की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। जिला प्रशासन की इस पहल को निजी शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और अभिभावकों का विश्वास मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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