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हुब्बल्ली में राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा आस्था का सैलाब

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 12 अग॰
  • 5 मिनट पठन
बड़े हॉल में सफेद कपड़ों व लाल साफों वाले पुरुषों की भीड़, पीछे और लोग बैठे; कोने में फाइल फोटो लिखा है.

राजेश्वर भवन जयकारों से गूंजा, राजस्थानी परिधान में महिलाओं ने दिखाई संस्कृति की झलक


भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुब्बल्ली | 11 अगस्त 2026। हुब्बल्ली में राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाई गई। राजेश्वर भवन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आंजणा (पटेल) समाज के श्रद्धालु परिवार सहित शामिल हुए। सुबह आरती और पूजा-अर्चना के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें जोधपुर से आए कुलदीप ओझा एंड पार्टी ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए राजेश्वर भगवान के जयकारे लगाते नजर आए।


पुण्यतिथि समारोह में महिलाओं की विशेष भागीदारी रही। पारंपरिक राजस्थानी परिधान और श्रृंगार में पहुंचीं महिलाओं ने प्रवासी समाज के बीच अपनी मातृभूमि की संस्कृति, परंपरा और संस्कारों की सुंदर झलक प्रस्तुत की। धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का यह दृश्य समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा।


भक्ति और संस्कृति का संगम बना पुण्यतिथि समारोह


आंजणा समाज के आराध्य संत राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि समाज के लिए केवल धार्मिक स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, सद्भाव और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण पर्व भी है। समारोह में श्रद्धालुओं ने राजेश्वर भगवान के आदर्शों को जीवन में उतारने तथा नई पीढ़ी को समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह आरती और पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। जोधपुर से आए कुलदीप ओझा एंड पार्टी की भक्ति प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजनों के दौरान पूरा वातावरण जयकारों और भक्तिभाव से गूंज उठा।

दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने प्रसादी ग्रहण की। शाम को आयोजित महाआरती में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। महाआरती के दौरान राजेश्वर भगवान के जयकारों से राजेश्वर भवन भक्तिमय हो उठा।


राजस्थानी परिधान में महिलाओं ने मोहा मन


समारोह में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा और पारंपरिक श्रृंगार के साथ कार्यक्रम में पहुंचीं। उनके परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने आयोजन को राजस्थान की लोक परंपराओं से जोड़ दिया।

प्रवास में रहने वाले समाजबंधुओं के लिए ऐसे आयोजन अपनी जड़ों, मातृभूमि और पारिवारिक संस्कारों से जुड़े रहने का माध्यम बनते हैं। महिलाओं की भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में परिवार और विशेष रूप से महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।


परिवार सहित शामिल हुए समाजबंधु


आयोजक संगठन की ओर से समाज के सभी बंधुओं से परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया गया था। समाज के व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों से भी धार्मिक आयोजन में सहभागिता के लिए सहयोग की अपील की गई।

इस अपील का सकारात्मक असर देखने को मिला और हुब्बल्ली-धारवाड़ के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी समाजबंधु परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचे। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।


नई पीढ़ी तक पहुंच रहे राजेश्वर भगवान के आदर्श


आंजणा (पटेल) समाज सेवा संगठन हुब्बली-धारवाड़ के सचिव वगताराम पारलू ने बताया कि राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष भी आयोजन में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि समाज को अपनी परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखना है। राजेश्वर भगवान के जीवन और संदेश से प्रेरणा लेकर समाज में सेवा, सद्भाव, अनुशासन और संस्कारों को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने आराध्य संतों और महापुरुषों के जीवन से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।


सेवा और सहयोग में आगे आए समाजबंधु


राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि के आयोजन को सफल बनाने में समाज के श्रद्धालुओं, दानदाताओं और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए समाजबंधुओं ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में योगदान दिया।

श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, दर्शन, भजन-कीर्तन, महाआरती और महाप्रसादी में भाग लेकर पुण्यलाभ प्राप्त किया। आयोजन के दौरान समाज की सामूहिक शक्ति और आपसी सहयोग की भावना भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।


सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश


राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित समारोह ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी मजबूत संदेश दिया। समाजबंधुओं ने एक-दूसरे से मिलकर पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत किया।

आयोजन में यह भावना प्रमुख रही कि समाज की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार, सेवा, सामाजिक सहयोग और सांस्कृतिक चेतना से भी होती है। धार्मिक आयोजन समाज को एक मंच पर लाने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।


गणमान्य समाजबंधुओं की रही मौजूदगी


समारोह में आंजणा (पटेल) समाज सेवा संगठन हुब्बली-धारवाड़ के अध्यक्ष सोपाराम काग, दूदाराम कान्दली, खंगाराम कान्दली, केवलराम ठां, किशोर पटेल, मूलाराम कान्दली, तेजाराम मालवी सिनली, पीराराम मालवी, रूपाराम ठां, कानाराम खाखरलाई, चैनाराम काग, ओमाराम सीह, केवलराम ठां, मूलाराम, डूंगराराम काग, विरमराम पोण, जूंजाराम काग, टिकमाराम मालवी, छोगाराम काग, रमेश करड़, कलाराम करड़, हरजीराम, सांवलराम, स्वरूपराम धारवाड़, विरमराम करलू, सोमाराम हारणी, सोमाराम मालवी सिनली, रूगनाथ मालवी, शेराराम ठां, भीमाराम करड़, अणदाराम तरक, नेमाराम काटोतरिया, कृष्णकुमार, जगदीश धुणिया, समर्थराम कुकील, मोहनराम अराबा, केराराम, मकराराम, पीराराम ठां, ओमाराम, तेजाराम बोका, मालाराम सीह, जालाराम मालवी सिनली सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे।


इसके अलावा कालूसिंह चौहान, सुभाषसिंह जमादार, रमेश बाफना, अभिषेक मेहता, संदीप मेहता, परबतसिंह खींची, वेलाराम घांची, अनोप दर्जी, धर्मेन्द्र माली, उदाराम प्रजापत, घेवरराम पोण, भीमाराम पोण, भीमाराम देवासी, जोगाराम तरक, तरण पटेल चाली, चुन्नीलाल सोलंकी, कैलाश सोलंकी, ओमाराम काग, ताम्बाराम सीह समेत अनेक गणमान्य लोग भी आयोजन में शामिल हुए।


राजेश्वर भवन में गूंजे जयकारे


पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का विशेष वातावरण रहा। भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना, महाआरती और महाप्रसादी के माध्यम से समाजबंधुओं ने राजेश्वर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

महाआरती के समय राजेश्वर भवन राजेश्वर भगवान के जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं और पुरुषों के साथ बच्चों एवं युवाओं ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

आयोजन के समापन पर समाजबंधुओं ने राजेश्वर भगवान के बताए आदर्शों को जीवन में अपनाने, समाज में आपसी भाईचारा बढ़ाने और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।


हुब्बल्ली में आयोजित राजेश्वर भगवान की 83वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रभावशाली संगम बनकर सामने आई। पारंपरिक राजस्थानी परिधान में महिलाओं की भागीदारी, भक्ति संगीत, महाआरती और महाप्रसादी ने समारोह को यादगार बना दिया।


आयोजन ने यह संदेश दिया कि प्रवासी समाज अपनी कर्मभूमि में रहते हुए भी अपनी मातृभूमि की संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक संस्कारों को मजबूती से जीवित रख सकता है। राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि का यह आयोजन समाज की एकजुटता और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

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