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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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‘सुविधा के लिए सिद्धांतों से समझौता न करें’, बेंगलुरु में CJI सूर्यकांत का युवा वकीलों को संदेश

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
2 दिन पहले
3 मिनट पठन
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बेंगलुरु में एनएलएसआईयू के 34वें दीक्षांत समारोह में विधि स्नातकों को नैतिकता और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया।

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु,17 अक्टूबर 2026। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में विधि स्नातकों को संबोधित करते हुए न्याय, नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में सफलता के लिए कानूनों और न्यायिक मिसालों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही बात के पक्ष में खड़े होने का साहस और दूसरों की बात सुनने की विनम्रता भी आवश्यक है।

समारोह के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि कुछ बाहरी ताकतों के कारण उत्पन्न अनचाही और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों ने दीक्षांत समारोह को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि यह अवसर अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाएगा। हालांकि, इन परिस्थितियों के बावजूद समारोह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित हुआ। इस दौरान स्नातकों को डिग्रियां प्रदान की गईं और शिक्षकों, विशिष्ट अतिथियों तथा विद्यार्थियों के परिजनों ने भाग लिया।


न्याय के लिए ज्ञान के साथ साहस भी जरूरी

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने युवा स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इसमें कानून और न्यायिक निर्णयों की गहरी समझ के साथ न्याय की रक्षा करने का साहस भी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वकीलों को उन लोगों की आवाज भी सुननी चाहिए, जिन्हें अक्सर समाज में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि बौद्धिक स्वतंत्रता के लिए निर्भीकता आवश्यक है। निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों को सुनना, किसी व्यक्ति को केवल उसकी सामाजिक या व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर नहीं आंकना और असहमति जताते समय दूसरे व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करना एक जिम्मेदार विधि पेशेवर की पहचान है।


कानून समाज के साथ निरंतर विकसित होता है

मुख्य न्यायाधीश ने कानून को एक जीवंत व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसका विकास उन लोगों की सोच, कार्यों और निर्णयों से होता है, जो इसे व्यवहार में लागू करते हैं। अदालतों में प्रस्तुत किए जाने वाले मामले, तैयार किए जाने वाले अनुबंध, दी जाने वाली कानूनी सलाह और लिखे जाने वाले न्यायिक निर्णय देश में न्याय व्यवस्था को आकार देने में योगदान करते हैं। उनके अनुसार, नए विधि स्नातकों की जिम्मेदारी केवल कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है। उनके पेशेवर निर्णयों का प्रभाव नागरिकों के अधिकारों, न्याय तक पहुंच और समाज में कानून के प्रति विश्वास पर भी पड़ता है।


निजी सुविधा से ऊपर रखें नैतिकता

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्नातकों को आगाह किया कि पेशेवर जीवन में आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्थान में अर्जित मूल्यों को अपने व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे के माध्यम से समाज की सेवा करने में गहरी संतुष्टि मिल सकती है। अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना, लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना और संविधान के मूल्यों को बनाए रखना इस पेशे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।


देश को केवल वकील नहीं, जिम्मेदार नागरिक भी चाहिए

सीजेआई ने युवा स्नातकों से राष्ट्र के प्रति अपनी व्यापक जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश उनसे केवल कुशल कानूनी पेशेवर बनने की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने की भी उम्मीद रखता है। उन्होंने स्नातकों को याद दिलाया कि संस्थान से निकलकर व्यावसायिक दुनिया में प्रवेश करते समय उन्हें अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यापक जनहित में करना चाहिए। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता उनके कार्यों का आधार होनी चाहिए।

बेंगलुरु में आयोजित दीक्षांत समारोह का संदेश स्पष्ट रहा—कानून की शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पेशेवर सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान देना भी है। युवा विधि स्नातकों के लिए ज्ञान, नैतिक साहस, विनम्रता और सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन ही उनकी पेशेवर पहचान को मजबूत बना सकता है।



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