सिद्धार्थनगर में ‘मौत की टंकी’, जल जीवन मिशन पर गंभीर सवाल
- धन्ना राम चौधरी

- 4 मई
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के Siddharthnagar में Jal Jeevan Mission की एक और परियोजना सवालों के घेरे में आ गई है। इटवा नगर पंचायत क्षेत्र में बनी पानी की टंकी आंधी-बारिश के बाद हवा में लटकती नजर आई, जिसने निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह खौफनाक दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा बन चुका है। वायरल तस्वीरों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
हवा में झूलती टंकी, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
Siddharthnagar के इटवा नगर पंचायत में करहिया पुल के पास जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी की टंकी अब ‘मौत का खतरा’ बन चुकी है। तेज हवा और बारिश के बाद टंकी का ढांचा इस कदर कमजोर हो गया कि वह हवा में लटकती दिखाई देने लगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, मामूली मौसम परिवर्तन में ही इस तरह का नुकसान होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह टंकी किसी भी वक्त गिर सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों में दहशत, ‘मौत की टंकी’ का नाम दिया
हवा में झूलती इस टंकी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोगों ने इसे ‘मौत की टंकी’ का नाम दे दिया है। आसपास रहने वाले परिवार डर के साए में जी रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई ग्रामीणों ने अपने घरों से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
भ्रष्टाचार के आरोप, निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी निर्माण में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार हुआ है। घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निगरानी की कमी के कारण यह स्थिति बनी है। Jal Jeevan Mission का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस मामले की जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
तुरंत क्षतिग्रस्त टंकी को हटाया जाए
उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए
भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी की जाए
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले Mahoba में भी जल जीवन मिशन के तहत बनी टंकी में उद्घाटन के तुरंत बाद लीकेज और दरारें सामने आई थीं।
ऐसे लगातार मामलों ने योजना की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उठते बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने आम नागरिकों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी?
क्या लोगों की जान से खिलवाड़ को रोका जा सकेगा?
क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर सख्त नियंत्रण होगा?
प्रशासन और जवाबदेही की परीक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
Q1. यह मामला कहां का है?
Q2. टंकी क्यों क्षतिग्रस्त हुई?
Q3. क्या प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है?
Q4. क्या यह पहली घटना है?
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अब आपकी बारी!
क्या आपको लगता है कि ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?
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