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प्रयागराज में ‘शौर्य संगम’—राष्ट्रभक्ति की गूंज, सेना के जज्बे को सलाम

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 4
  • 3 min read
राष्ट्रभक्ति से सराबोर प्रयागराज का शौर्य संगम shaurya-sangam-prayagraj-2026.jpg
राष्ट्रभक्ति से सराबोर प्रयागराज का शौर्य संगम shaurya-sangam-prayagraj-2026.jpg

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

प्रयागराज। राजनाथ सिंह की मौजूदगी में संगम नगरी प्रयागराज ने रविवार शाम एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल का साक्षात्कार किया। सांस्कृतिक शौर्य संगम में जब सेना के बैंड की ओजस्वी धुनें गूंजीं, तो पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गौरव से भर उठा। रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों के अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा—“हमारे लिए सशस्त्र बलों का मूल मंत्र है—राष्ट्र प्रथम।”


प्रयागराज में आयोजित सांस्कृतिक शौर्य संगम ने देशभक्ति और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम पेश किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के शौर्य की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बल हर परिस्थिति में “राष्ट्र प्रथम” के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। सेना के बैंड, शास्त्रीय संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भव्य बना दिया। यह आयोजन ‘नार्थ टेक सिम्पोजियम-2026’ से पहले एक प्रेरणादायक शुरुआत साबित हुआ।

भक्ति, शक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम

अरैल घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति की लहर साफ महसूस की गई।

  • सेना के बैंड की धुनों ने अनुशासन और वीरता का परिचय दिया

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भारतीय परंपरा को जीवंत किया

  • दर्शक मंत्रमुग्ध होकर कार्यक्रम का आनंद लेते रहे

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र भावना का उत्सव बन गया।

कलाकारों ने बांधा समां

कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से चार चांद लगाए—

  • मालिनी अवस्थी ने अपनी सुरीली आवाज से मिट्टी की खुशबू और देशप्रेम को जीवंत किया

  • पंडित बिरजू महाराज के सुपुत्र और उनकी टीम ने कथक की भव्य प्रस्तुति दी

  • तबला और संतूर की जुगलबंदी ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया

कार्यक्रम के अंत में रक्षा मंत्री ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया।

“राष्ट्र प्रथम” का संकल्प दोहराया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि हर संकट में देशवासियों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा—

“हमारे जवान प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में भी सबसे पहले सेवा के लिए खड़े होते हैं।”

विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे—

  • उपेंद्र द्विवेदी

  • नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी

  • हर्षवर्धन वाजपेयी

सभी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताया।

‘नार्थ टेक सिम्पोजियम-2026’ की भव्य शुरुआत

यह सांस्कृतिक आयोजन दरअसल नार्थ टेक सिम्पोजियम 2026 की प्रस्तावना था।

  • 284 कंपनियां स्वदेशी रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन करेंगी

  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूती देने पर जोर रहेगा

इसे “रक्षा कुंभ” के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों खास रहा यह आयोजन? (Key Insights)

  • सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा मेल

  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम

  • सेना के प्रति सम्मान और विश्वास का संदेश

  • युवाओं में राष्ट्रभक्ति का संचार

आपके मन में उठ रहे सवाल

  • क्या ऐसे आयोजन युवाओं में देशभक्ति बढ़ाते हैं?

  • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ रक्षा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है?

  • क्या सैन्य और सांस्कृतिक मेल से समाज में सकारात्मक ऊर्जा आती है?

  • क्या ऐसे कार्यक्रम देश की एकता को मजबूत करते हैं?

Q1. ‘सांस्कृतिक शौर्य संगम’ कहां आयोजित हुआ?

Q2. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन थे?

Q3. ‘नार्थ टेक सिम्पोजियम’ क्या है?

Q4. कितनी कंपनियां भाग ले रही हैं?

अब आपकी बारी!

यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र भावना का उत्सव था।

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