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10 उपग्रहों का ऐतिहासिक प्रहार: भारत ने अंतरिक्ष में लिखी नई इबारत

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 28
  • 3 min read
 2008 में PSLV-C9 द्वारा 10 उपग्रहों का ऐतिहासिक प्रक्षेपण  PSLV-C9 Multi Satellite Launch India
 2008 में PSLV-C9 द्वारा 10 उपग्रहों का ऐतिहासिक प्रक्षेपण PSLV-C9 Multi Satellite Launch India

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

28 अप्रैल 2008—यह वह दिन था जब भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में ऐसा धमाका किया, जिसकी गूंज वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक सुनाई दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भरोसेमंद रॉकेट PSLV-C9 मिशन ने एक साथ 10 उपग्रह लॉन्च कर इतिहास रच दिया। सीमित संसाधनों में भारत की इस उपलब्धि ने न केवल तकनीकी श्रेष्ठता साबित की, बल्कि दुनिया को यह संदेश दिया—अब अंतरिक्ष में भारत किसी से कम नहीं। यह मिशन सिर्फ लॉन्च नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की उड़ान थी।

अंतरिक्ष में भारत की ‘मल्टी-पेलोड’ क्रांति

आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने वाला PSLV-C9 मिशन भारत का पहला सफल “मल्टी-पेलोड लॉन्च” था। इस मिशन में एक साथ 10 उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करना था—जो तकनीकी रूप से बेहद जटिल कार्य माना जाता है।

रॉकेट की चार-स्टेज संरचना, अलग-अलग ईंधन तकनीक और सटीक टाइमिंग—इन सबका समन्वय इस मिशन की असली परीक्षा था। जरा सी चूक पूरे मिशन को विफल कर सकती थी, लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों ने इसे शानदार तरीके से अंजाम दिया।

दुनिया क्यों रह गई दंग?

उस समय तक अंतरिक्ष लॉन्च की दुनिया में अमेरिका, रूस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और चीन जैसे देश ही दबदबा रखते थे। ऐसे में भारत का यह कदम गेम-चेंजर साबित हुआ।

  • एक साथ 10 उपग्रह लॉन्च करना

  • कुल 824 किलोग्राम पेलोड

  • अलग-अलग समय और ऊंचाई पर सटीक डिप्लॉयमेंट

यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण थी।

भारत के लिए क्यों ऐतिहासिक था यह मिशन?

यह सफलता भारत की वर्षों की मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम थी। इसरो ने कम बजट में विश्वस्तरीय प्रदर्शन कर यह साबित किया कि संसाधनों की कमी सफलता में बाधा नहीं बनती।

इस मिशन के बाद:

  • भारत अंतरराष्ट्रीय लॉन्च मार्केट में उभरा

  • छोटे देशों के लिए सस्ता और भरोसेमंद विकल्प बना

  • भविष्य के बड़े मिशनों (जैसे 104 उपग्रह लॉन्च – 2017) की नींव रखी गई

मिशन की मुख्य झलक

  • मुख्य उपग्रह: Cartosat-2A (690 किग्रा)

  • दूसरा उपग्रह: IMS-1 (83 किग्रा)

  • अन्य: 8 नैनो सैटेलाइट (कनाडा, जर्मनी, जापान आदि)

  • कुल वजन: 824 किलोग्राम

क्या था विवाद?

Cartosat-2A को लेकर सवाल उठा कि क्या यह एक “डिफेंस सैटेलाइट” था?

हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे रिमोट सेंसिंग के लिए बताया गया, लेकिन इसकी हाई-रिजोल्यूशन क्षमता ने इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।

क्या यह विश्व रिकॉर्ड था?

  • दिलचस्प बात यह है कि 2007 में रूस ने 16 उपग्रह लॉन्च किए थे, लेकिन उनका कुल वजन कम था।

  • भारत ने 824 किलोग्राम पेलोड के साथ “सबसे भारी मल्टी-सैटेलाइट लॉन्च” का रिकॉर्ड बनाया।

बाद में 2017 में PSLV-C37 मिशन ने 104 उपग्रह लॉन्च कर नया इतिहास रचा।

आपके मन में उठ रहे सवाल

क्या भारत भविष्य में स्पेस रेस में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ सकता है?

क्या निजी कंपनियों के आने से ISRO की भूमिका बदलेगी?

क्या ऐसे मिशन भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेंगे?

Q1. PSLV-C9 मिशन की सबसे बड़ी खासियत क्या थी?

Q2. कुल कितने देशों के उपग्रह थे?

Q3. क्या यह मिशन आर्थिक रूप से फायदेमंद रहा?

अब आपकी बारी!

क्या आपको लगता है कि भारत अंतरिक्ष की सुपरपावर बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है?

अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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