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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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शरावती पंप स्टोरेज परियोजना के विरोध में उठी जनआवाज, “कारगल चलो” आंदोलन तेज

लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
धन्नाराम चौधरी
28 जून
2 मिनट पठन
Seven adults pose barefoot in front of a decorated bus with Pranao Vibha text on a sunny street.
पश्चिमी घाट और पर्यावरण बचाने के लिए मलनाड क्षेत्र में गैर-राजनीतिक जन आंदोलन, हजारों पेड़ों और जैव विविधता पर खतरे का दावा

शरावती पंप स्टोरेज परियोजना के विरोध में “कारगल चलो” आंदोलन में शामिल पर्यावरण प्रेमी और नागरिक

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिमोगा | 28 जून, 2026 मलनाड क्षेत्र में प्रस्तावित शरावती पंप स्टोरेज परियोजना के विरोध में अब जन आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। पर्यावरण संरक्षण, पश्चिमी घाट की जैव विविधता और स्थानीय लोगों की आजीविका को बचाने की मांग को लेकर “कारगल चलो” मुहीम के तहत बड़ी संख्या में नागरिक, पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट हो रहे हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री के. एस. ईश्वरप्पा और युवा नेता श्री के. ई. कांतेश के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताया जा रहा है।


आंदोलनकारियों का कहना है कि शरावती पंप स्टोरेज परियोजना से पश्चिमी घाट के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। एक्टिविस्ट्स के अनुसार इस परियोजना के कारण हजारों पेड़ों की कटाई, जंगल क्षेत्रों को नुकसान, वन्य जीवों के प्राकृतिक मार्गों में बाधा और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसके साथ ही स्थानीय जैव विविधता और मलनाड क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन पर दीर्घकालिक खतरे की संभावना जताई जा रही है।


पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पश्चिमी घाट पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका भी इस परियोजना से प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कई सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और नागरिक समूहों ने इस परियोजना की समीक्षा और पुनर्विचार की मांग उठाई है।


“कारगल चलो” अभियान के तहत रविवार 28 जून 2026 को नागरिकों का एक बड़ा समूह सुबह 7 बजे शुभमंगला कल्याण मंडप में एकत्रित होगा। यहां से नाश्ते के बाद बस द्वारा सागर के लिए प्रस्थान किया जाएगा। सागर के गांधी सर्कल पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के बाद आंदोलनकारी इक्केरी अघोरेश्वर मंदिर और सिंगंदूर चौदेश्वरी देवी मंदिर दर्शन के लिए रवाना होंगे।


इसके बाद दोपहर 2 बजे कारगल पहुंचकर KPCL अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और पश्चिमी घाट बचाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। कार्यक्रम के अंतर्गत वरदहल्ली श्रीधर आश्रम में महामंगल आरती में भाग लेने के बाद सभी आंदोलनकारी शिवमोग्गा लौटेंगे।


आंदोलन से जुड़े लोगों ने स्थानीय नागरिकों और प्रवासी राजस्थानी समाज से भी इस पर्यावरण संरक्षण अभियान में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि “प्रकृति की रक्षा का अर्थ आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा करना है।”

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