विक्रमशिला सेतु का पिलर ध्वस्त, गंगा में समाया हिस्सा; आवागमन पूरी तरह ठप
- धन्ना राम चौधरी

- 4 मई
- 3 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 5 मई

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु पर रविवार देर रात बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब सेतु का 133 नंबर पिलर पहले धंसा और फिर कुछ ही देर में गंगा में समा गया। घटना रात 11:55 बजे शुरू हुई और करीब 1:07 बजे तक हालात बेहद गंभीर हो गए। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु का एक बड़ा हिस्सा अचानक गंगा में समा गया, जिससे हड़कंप मच गया। रविवार रात 133 नंबर पिलर के धंसने के बाद करीब 33 मीटर पुल ढह गया। समय रहते ट्रैफिक रोकने से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने तुरंत पुल को सील कर वैकल्पिक मार्ग लागू कर दिया है। इस घटना ने पुल की सुरक्षा, रखरखाव और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ मिनटों में बदला पूरा मंजर
रविवार रात 11:50 बजे पुल के सस्पेंशन हिस्से में गैप नजर आया। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला—
12:10 बजे: ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची
12:15 बजे: दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही बंद
12:50 बजे: करीब 33 मीटर हिस्सा गंगा में समाया
1:07 बजे: पिलर पूरी तरह ध्वस्त
इस दौरान मौके पर अफरातफरी मच गई, लेकिन सतर्कता के कारण कोई वाहन नीचे नहीं गिरा।
प्रशासन की सतर्कता से टली बड़ी त्रासदी
रेंज आईजी विवेक कुमार के निर्देश पर एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और अन्य अधिकारियों ने तुरंत ट्रैफिक रोक दिया। जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने मौके पर पहुंचकर पुल को पूरी तरह खाली करवा दिया। यही कारण रहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद कोई जनहानि नहीं हुई।
बिहार की लाइफलाइन पर संकट
विक्रमशिला सेतु भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाला प्रमुख पुल है।
रोजाना 1 लाख से ज्यादा लोग इसका उपयोग करते हैं
कोसी-सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी इसी पर निर्भर
अब पुल के बंद होने से दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क लगभग टूट गया है।
क्या पहले से मिल रहे थे संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार:
एक माह पहले पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल में दरारें आई थीं
गंगा की तेज धारा से स्थिति बिगड़ रही थी
समय पर मरम्मत नहीं हुई
यही लापरवाही अब बड़ी वजह बनती नजर आ रही है।
मरम्मत में लगेंगे 15–20 दिन
इंजीनियरों के मुताबिक, क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करना आसान नहीं होगा।
कम से कम 15–20 दिन का समय लग सकता है
तब तक यातायात पूरी तरह बंद रहेगा
फिलहाल वैकल्पिक मार्ग के तौर पर सुल्तानगंज–मुंगेर रूट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
लोगों को हो रही भारी परेशानी
पुल बंद होते ही:
दोनों ओर लंबा जाम लग गया
यात्रियों को कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा है
स्थानीय व्यापार और आवागमन पर सीधा असर पड़ा है
क्यों बड़ा मुद्दा बना यह हादसा? (Key Insights)
इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर सवाल
मेंटेनेंस में लापरवाही उजागर
प्रशासनिक जवाबदेही की मांग तेज
लाखों लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित
आपके मन में उठ रहे सवाल
क्या समय पर मरम्मत होती तो यह हादसा टल सकता था?
क्या देश के अन्य पुल भी इसी तरह जोखिम में हैं?
जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या वैकल्पिक व्यवस्था पर्याप्त है?
Q1. विक्रमशिला सेतु कब बना था?
Q2. कितना हिस्सा गिरा है?
Q3. क्या कोई जनहानि हुई?
Q4. अब कौन सा रास्ता अपनाएं?
Q5. पुल कब तक ठीक होगा?
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अब आपकी बारी!
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