लद्दाख पर सन्नाटा क्यों? राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची पर सरकार घिरी
- धन्ना राम चौधरी

- 30 अप्रैल
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
लद्दाख। क्या लद्दाख को उसका हक मिलेगा या फिर राजनीतिक खामोशी यूं ही जारी रहेगी? देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र लद्दाख को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के ताजा लद्दाख दौरे ने जहां उम्मीदें जगाईं, वहीं Indian National Congress ने सरकार की चुप्पी पर तीखा हमला बोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कब तक लद्दाख के लोगों की मांगों को अनदेखा किया जाएगा?
सबसे अहम मुद्दा
लद्दाख में बढ़ते असंतोष, राज्य का दर्जा (Statehood for Ladakh) और संविधान की Sixth Schedule Ladakh के तहत सुरक्षा की मांग ने सियासत को गर्म कर दिया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद भी लद्दाख के लोगों को न तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला और न ही संसाधनों पर अधिकार। इस बीच अमित शाह का दौरा कई सवाल छोड़ गया—क्या सरकार जल्द कोई बड़ा फैसला लेने वाली है या फिर यह मुद्दा भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा?
क्या है पूरा विवाद?
2019 में Article 370 Abrogation के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। उस समय इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया गया था, लेकिन अब स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना है कि इस फैसले के बाद उनकी राजनीतिक आवाज कमजोर हो गई है।
लद्दाख के लोगों की दो मुख्य मांगें हैं:
पूर्ण राज्य का दर्जा (Full Statehood Ladakh)
संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा (Sixth Schedule Protection)
छठी अनुसूची के तहत स्थानीय निकायों को जमीन, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के अधिकार मिलते हैं—जैसा कि पूर्वोत्तर राज्यों में देखा जाता है।
कांग्रेस का हमला – “सरकार जवाब दे”
जयराम रमेश ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि:
लद्दाख में विरोध प्रदर्शन हुए
कई लोगों पर केस दर्ज किए गए
सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को NSA के तहत हिरासत में लिया गया
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गृहमंत्री का यह दौरा “छुट्टी” जैसा लग रहा है, जबकि असली मुद्दों पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई।
सरकार की चुप्पी के पीछे क्या कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं:
रणनीतिक महत्व: लद्दाख चीन सीमा से सटा बेहद संवेदनशील क्षेत्र है
प्रशासनिक जटिलताएं: नए जिलों और परिषदों का गठन
राजनीतिक संतुलन: स्थानीय बनाम राष्ट्रीय हित
इसी वजह से केंद्र सरकार कोई जल्दबाजी में निर्णय लेने से बच रही है।
आपके मन में उठ रहे सवाल
क्या लद्दाख को जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा?
छठी अनुसूची लागू करने में देरी क्यों हो रही है?
क्या सरकार स्थानीय आवाजों को नजरअंदाज कर रही है?
क्या यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक हथियार बनेगा?
Q1. लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश कब बनाया गया?
Q2. छठी अनुसूची क्या है?
Q3. लद्दाख के लोग क्या मांग कर रहे हैं?
Q4. सरकार ने अब तक क्या जवाब दिया है?
#StatehoodforLadakh, #SixthScheduleLadakh, #AmitShahLadakhVisit, #LadakhProtest, #LadakhNews, #ladakh, #geopolitics, #protests, #ladakhstatehood, #sixthschedule, #indianpolitics, #whyisladakhprotestingforstatehood, #importanceofsixthscheduleforladakh, #currentsituationinladakhexplained
अब आपकी बारी!
इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।
राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार
👉 सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए जुड़े रहें
“Bhaarataarth Khabar” के साथ
Support करें – Like | Share | Follow
ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे।
_edited.jpg)



टिप्पणियां