लक्षद्वीप में शराब नीति पर विवाद, सांसद बोले—युवाओं और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ेगा असर
- धन्ना राम चौधरी

- 30 मार्च
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भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कवारत्ती। केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में कुछ द्वीपों पर शराब उपलब्ध कराने के प्रशासनिक फैसले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस निर्णय का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है और जनप्रतिनिधियों ने भी इस पर गंभीर चिंता जताई है। क्षेत्र के सांसद मोहम्मद हमदुल्ला सईद ने कहा है कि इस तरह के कदम से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है और समाज में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
सांसद ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि लक्षद्वीप की सामाजिक संरचना अब तक अपेक्षाकृत शांत और संयमित रही है, जहां शराब पर कड़े नियंत्रण के कारण सामाजिक संतुलन बना हुआ था। उन्होंने आशंका जताई कि यदि कुछ द्वीपों पर शराब की उपलब्धता बढ़ाई जाती है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव विशेष रूप से युवाओं पर पड़ेगा। इससे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ेंगी, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक विवादों में भी वृद्धि हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह निर्णय द्वीपों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवनशैली के विपरीत है। उनका कहना है कि प्रशासन को पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर ऐसे कदम उठाने से पहले स्थानीय समुदाय की राय अवश्य लेनी चाहिए थी।
प्रशासन का पक्ष है कि यह कदम पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ चुनिंदा द्वीपों पर नियंत्रित तरीके से शराब उपलब्ध कराने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। हालांकि, इस दावे को लेकर भी मतभेद सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन विकास और सामाजिक संतुलन के बीच संतुलित नीति बनाना जरूरी है। यदि स्थानीय भावनाओं और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की अनदेखी की जाती है, तो इससे दीर्घकालिक सामाजिक असंतोष उत्पन्न हो सकता है। फिलहाल, यह मुद्दा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में इस पर क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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