मोबाइल लॉक कर वसूली पर RBI की सख्ती: डिफॉल्टरों को बड़ी राहत, रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर लगेगी रोक
- धन्ना राम चौधरी

- 21 मई
- 4 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
मुंबई, 21 मई। देशभर के करोड़ों लोन ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग रिकवरी सिस्टम में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अब बैंक पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए ग्राहकों के मोबाइल फोन को लॉक, डिसेबल या उसकी सेवाएं बाधित नहीं कर सकेंगे। केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि केवल वही डिवाइस प्रतिबंधित किए जा सकेंगे, जिन्हें संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था ने स्वयं फाइनेंस किया हो।
आरबीआई की ओर से जारी प्रस्तावित नियमों के अनुसार यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू की जा सकती है। इन निर्देशों का उद्देश्य रिकवरी एजेंटों की कथित मनमानी, डिजिटल उत्पीड़न और ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार पर लगाम लगाना है। हाल के महीनों में सोशल मीडिया और शिकायत पोर्टलों पर कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों को मानसिक रूप से परेशान करने, धमकी देने और मोबाइल सेवाएं बाधित करने जैसे आरोप लगे थे।
क्या कहा RBI ने?
आरबीआई ने अपने मसौदा निर्देश में स्पष्ट किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था ऐसी तकनीक का उपयोग नहीं करेगी, जिससे उधारकर्ता के मोबाइल डिवाइस की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित हो।
हालांकि, यदि मोबाइल, टैबलेट या अन्य डिवाइस को उसी बैंक ने फाइनेंस किया है और उसका भुगतान लंबे समय तक बकाया है, तब कुछ शर्तों के तहत डिवाइस को ब्लॉक किया जा सकता है। इसके लिए भी जरूरी होगा कि संबंधित लोन खाता कम-से-कम 90 दिनों तक एनपीए (Non-Performing Asset) की स्थिति में हो।
गलत कार्रवाई पर मिलेगा मुआवजा
आरबीआई ने ग्राहकों के हित में एक और बड़ा प्रावधान जोड़ा है। यदि किसी बैंक ने गलती से किसी ग्राहक का डिवाइस ब्लॉक कर दिया या ब्लॉक हटाने में देरी की, तो बैंक को ग्राहक को 250 रुपये प्रति घंटे की दर से मुआवजा देना होगा। यह मुआवजा तब तक जारी रहेगा, जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
रिकवरी एजेंटों की निगरानी होगी सख्त
आरबीआई ने केवल मोबाइल लॉकिंग पर ही नहीं, बल्कि रिकवरी एजेंटों की गतिविधियों पर भी सख्त निगरानी का प्रस्ताव रखा है।
नए मसौदे के तहत बैंकों को यह रिकॉर्ड रखना होगा कि रिकवरी एजेंट या बैंक कर्मचारियों ने उधारकर्ता या गारंटर को कितनी बार फोन किया, किस समय संपर्क किया और बातचीत का स्वरूप क्या था।
इससे ग्राहकों को बार-बार कॉल, मानसिक दबाव और अनुचित व्यवहार से राहत मिलने की उम्मीद है। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इससे रिकवरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत में डिजिटल लोन और फिनटेक सेवाओं के तेजी से बढ़ने के साथ रिकवरी से जुड़े विवाद भी बढ़े हैं। कई मामलों में ग्राहकों ने आरोप लगाया कि छोटी बकाया राशि के कारण उनके मोबाइल ऐप बंद कर दिए गए या फोन की सुविधाएं सीमित कर दी गईं।
आरबीआई का यह कदम ऐसे मामलों में संतुलन बनाने की कोशिश माना जा रहा है, जहां एक ओर बैंकों का पैसा सुरक्षित रहे और दूसरी ओर ग्राहकों की गरिमा व निजता भी बनी रहे।
बैंकिंग सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार नए नियम लागू होने के बाद बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अपनी रिकवरी नीति और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम में बदलाव करना पड़ सकता है। साथ ही, ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी।
यह भी माना जा रहा है कि आरबीआई के इस कदम से भविष्य में रिकवरी एजेंटों की जवाबदेही बढ़ेगी और उपभोक्ता अधिकारों को कानूनी मजबूती मिलेगी।
आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A)
Q1. क्या अब बैंक किसी भी हालत में फोन लॉक नहीं कर सकेंगे?
नहीं। यदि मोबाइल डिवाइस उसी बैंक या फाइनेंस कंपनी द्वारा फाइनेंस किया गया है और भुगतान 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया है, तभी सीमित परिस्थितियों में डिवाइस ब्लॉक किया जा सकेगा।
Q2. क्या पर्सनल लोन या होम लोन पर मोबाइल ब्लॉक किया जा सकेगा?
नहीं। आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार सामान्य पर्सनल, होम या कार लोन की रिकवरी के लिए मोबाइल लॉक नहीं किया जा सकेगा।
Q3. गलत तरीके से फोन ब्लॉक होने पर ग्राहक क्या कर सकता है?
ग्राहक बैंक से शिकायत कर सकता है। देरी होने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे की दर से मुआवजा देना होगा।
Q4. नए नियम कब से लागू होंगे?
आरबीआई ने इन्हें 1 अक्टूबर 2026 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है।
Q5. क्या रिकवरी एजेंटों की कॉल रिकॉर्ड होगी?
हाँ। बैंकों को कॉल की संख्या, समय और विवरण रिकॉर्ड रखने होंगे।
निष्कर्ष: आरबीआई का यह प्रस्ताव डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहकों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर रोक लगेगी, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह नियम देश के करोड़ों लोन उपभोक्ताओं के लिए राहत का कारण बन सकता है।
कीवर्ड्स: RBI के नए नियम 2026, लोन रिकवरी के नियम, बैंक द्वारा मोबाइल फ़ोन लॉक, रिकवरी एजेंट्स पर RBI के दिशानिर्देश, बैंक लोन डिफ़ॉल्ट से जुड़ी खबरें
Source: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी मसौदा निर्देश और आधिकारिक बैंकिंग नियामकीय
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क्या आपको लगता है कि आरबीआई का यह फैसला ग्राहकों के हित में है?
क्या रिकवरी एजेंटों की सख्ती पर पहले ही नियंत्रण होना चाहिए था?
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