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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की पहल पर सियासी घमासान: 200 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर, संसद में पेश हो सकता है प्रस्ताव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 12
  • 2 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने संसद में घेराबंदी तेज कर दी है। विपक्षी दलों के 200 से अधिक सांसदों ने उन्हें हटाने के प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। यह मामला संसद के आगामी सत्र में राजनीतिक बहस और टकराव का बड़ा मुद्दा बन सकता है।


सूत्रों के अनुसार इस नोटिस पर लोकसभा के लगभग 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। संसद के नियमों के अनुसार किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम 100 लोकसभा सांसदों या 50 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इस दृष्टि से विपक्ष द्वारा जुटाए गए हस्ताक्षर आवश्यक संख्या से अधिक बताए जा रहे हैं।


बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव शुक्रवार को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।


इंडिया गठबंधन के दलों का समर्थन

सूत्रों के मुताबिक इस नोटिस पर इंडिया गठबंधन से जुड़े अधिकांश दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं, जबकि पार्टी फिलहाल औपचारिक रूप से इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है।


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए इस प्रकार का औपचारिक नोटिस विपक्ष द्वारा तैयार किया गया है। इससे संसद में आने वाले दिनों में तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।


नोटिस में लगाए गए कई आरोप

सूत्रों के अनुसार नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें अपने पद पर रहते हुए किसी एक राजनीतिक दल का पक्ष लेने, चुनावी अनियमितताओं की जांच को जानबूझकर रोकने तथा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को नजरअंदाज करने जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं।


हालांकि इन आरोपों पर अभी तक चुनाव आयोग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


हटाने की प्रक्रिया बेहद कठिन

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठोर और जटिल मानी जाती है। भारतीय संविधान के तहत उन्हें उसी प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जा सकता है, जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को पद से हटाया जाता है।


इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य होता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। साथ ही हटाने का आधार केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता ही हो सकता है।


संसद में बढ़ेगी राजनीतिक सरगर्मी

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव संसद में पेश होता है तो यह सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष जहां चुनावी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार की ओर से भी इस पर कड़ा जवाब आने की संभावना है।


आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर होने वाली बहस देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।

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