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मिलावटखोरों पर दोहरी कार्रवाई: नकली खाद फैक्ट्री और जहरीले रंग वाली सौंफ का भंडाफोड़

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 days ago
  • 4 min read
“गुजरात के ऊंझा में खाद्य विभाग द्वारा रासायनिक रंग मिली सौंफ और नकली खाद फैक्ट्री पर की गई छापेमारी”
“गुजरात के ऊंझा में खाद्य विभाग द्वारा रासायनिक रंग मिली सौंफ और नकली खाद फैक्ट्री पर की गई छापेमारी”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: अहमदाबाद/ऊंझा, गुजरात | 23 मई 2026| गुजरात में मिलावट और अवैध उत्पादन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों का खुलासा किया है। एक तरफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने आणंद जिले में नकली खाद बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश किया, वहीं दूसरी ओर खाद्य एवं औषधि नियमन विभाग की फ्लाइंग स्क्वॉड ने ऊंझा में सौंफ में रासायनिक रंग मिलाने के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया। दोनों मामलों में लाखों रुपए का सामान जब्त किया गया है और जांच एजेंसियों ने संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और आम लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि दोनों ही मामलों में बिना लाइसेंस उत्पादन और मिलावटी सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि प्रारंभिक जांच में सामने आई है।

नकली खाद फैक्ट्री पर एसओजी का बड़ा छापा

आणंद जिले के वडोद गांव के पास चल रहे अवैध नकली खाद कारोबार का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि वडोद-नापाड रोड स्थित बलियादेव मंदिर के पास एक तंबाकू गोदाम में नकली खाद तैयार की जा रही है।

सूचना के आधार पर एसओजी टीम ने तत्काल छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान आरोपी रघुवीर सोलंकी को मौके से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी मूल रूप से भावनगर का निवासी है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने:

  • 3454 बोरियां विभिन्न ब्रांड की नकली खाद,

  • 15090 खाली बोरियां,

  • खाद में मिलावट के लिए उपयोगी सामग्री,

  • इलेक्ट्रिक सिलाई मशीन,

  • वजन कांटा,

  • मिक्सर मशीन,

  • और एक ट्रक जब्त किया।

पुलिस के अनुसार जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 18 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है।

लैब रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

इस मामले में पहले वासद पुलिस स्टेशन में प्राथमिक जानकारी दर्ज की गई थी। बाद में कृषि विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर खाद के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए।

प्राप्त लैब रिपोर्ट में यह खाद “बनावटी मिश्रित खाद” पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली खाद किसानों की फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे उत्पादन क्षमता घटने के साथ आर्थिक नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है।

ऊंझा में सौंफ को हरा दिखाने के लिए मिलाया जा रहा था रासायनिक रंग

मसालों और सौंफ के बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले ऊंझा में भी चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि नियमन विभाग की फ्लाइंग स्क्वॉड ने यहां गणपति क्लीनिंग फैक्ट्री पर छापा मारकर सौंफ में प्रतिबंधित रासायनिक रंग मिलाने का खुलासा किया।

अधिकारियों के अनुसार सौंफ को अधिक ताजा, चमकदार और हरा दिखाने के लिए उसमें कृत्रिम हरा रंग मिलाया जा रहा था ताकि बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा जा सके।

कार्रवाई के दौरान टीम ने:

  • 3548 किलोग्राम सौंफ,

  • और 140 किलोग्राम हरा रासायनिक रंग जब्त किया।

जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 3.30 लाख रुपए बताई गई है।

बिना फूड लाइसेंस चल रही थी फैक्ट्री

जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री संचालकों के पास खाद्य पदार्थों के उत्पादन और प्रोसेसिंग के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं था। यानी पूरा कारोबार बिना वैध अनुमति के संचालित किया जा रहा था।

अधिकारियों ने सौंफ और रासायनिक रंग के नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले रासायनिक रंग लंबे समय तक सेवन करने पर लीवर, पेट और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

लोगों के मन में उठ रहे बड़े सवाल

हालिया घटनाक्रम के बाद आम नागरिकों और किसानों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं:

  • बाजार में बिक रही खाद और मसालों की गुणवत्ता की जांच कितनी नियमित होती है?

  • नकली खाद किसानों तक कितने समय से पहुंच रही थी?

  • क्या खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है?

  • बिना लाइसेंस चल रही फैक्ट्रियां प्रशासन की नजर से कैसे बच रही थीं?

  • क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर और सख्त कार्रवाई होगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित निरीक्षण, सख्त कानूनी कार्रवाई और उपभोक्ता जागरूकता ही मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण का रास्ता बन सकती है।

FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. नकली खाद फैक्ट्री कहां पकड़ी गई?

आणंद जिले के वडोद गांव के पास स्थित एक गोदाम में।

Q2. पुलिस ने कितने रुपए का सामान जब्त किया?

करीब 18 लाख रुपए से अधिक का मुद्दामाल जब्त किया गया।

Q3. ऊंझा में क्या मिलावट पकड़ी गई?

सौंफ को हरा और आकर्षक दिखाने के लिए उसमें रासायनिक रंग मिलाया जा रहा था।

Q4. कितनी सौंफ जब्त की गई?

करीब 3548 किलोग्राम सौंफ जब्त की गई।

Q5. क्या फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था?

नहीं, जांच में फूड लाइसेंस नहीं होने की बात सामने आई है।

निष्कर्ष: गुजरात में सामने आए ये दोनों मामले केवल अवैध कारोबार का खुलासा भर नहीं हैं, बल्कि यह उपभोक्ता सुरक्षा और कृषि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती भी हैं। एक ओर नकली खाद किसानों की मेहनत और उत्पादन पर असर डाल सकती है, वहीं दूसरी ओर खाद्य पदार्थों में मिलावट सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा मुद्दा है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मिलावट और बिना लाइसेंस कारोबार पर अब निगरानी और सख्ती बढ़ाई जा रही है।

स्रोत: गुजरात पुलिस एसओजी, वासद पुलिस स्टेशन, खाद्य एवं औषधि नियमन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन से प्राप्त जानकारी।

मुख्य शब्द: नकली खाद फैक्ट्री, ऊंझा सौंफ समाचार, गुजरात खाद्य मिलावट, आनंद SOG छापा, सौंफ में रासायनिक रंग

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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