महिला प्रतिनिधित्व, RSS और भ्रष्टाचार पर विजयेंद्र का कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला
- धन्नाराम चौधरी

- 15 अग॰
- 5 मिनट पठन
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बोले—कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं होना महिलाओं का अपमान; RSS पर कथित रोक की कोशिश और नागेंद्र की वापसी पर भी सरकार को घेरा

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 14 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर महिला प्रतिनिधित्व, RSS की गतिविधियों, कथित भ्रष्टाचार और मंत्रियों की जिम्मेदारियों को लेकर तीखा हमला बोला। मां भुवनेश्वरी की प्रतिमा के सामने बीजेपी MLA और विधान परिषद सदस्यों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान विजयेंद्र ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल में महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा गंभीर विषय है।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि राज्य और देश की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब आधी है, इसलिए शासन व्यवस्था में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने हालिया कैबिनेट विस्तार के दौरान एक महिला के नाम की चर्चा होने और बाद में नाम हटाए जाने का हवाला देते हुए कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने इसी दौरान RSS को लेकर सरकार के कथित रुख, वाल्मीकि विकास निगम से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों और मंत्री जमीर अहमद द्वारा विजयनगर के प्रभारी मंत्री पद से इनकार किए जाने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा।
कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी पर सवाल
विजयेंद्र ने कहा कि महिलाओं को राजनीति और शासन में समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि केंद्र में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े कदमों का विरोध करने वाली पार्टी अब कर्नाटक में खुद महिलाओं को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक को सामाजिक सुधार और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बनना चाहिए। ऐसे में विधानसभा का सत्र चलने के दौरान मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर महिला समुदाय के सम्मान से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की और कहा कि राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
RSS को लेकर सरकार को विजयेंद्र की चुनौती

विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि सार्वजनिक बैठकों के लिए अनुमति जैसे प्रावधानों के माध्यम से RSS की गतिविधियों पर अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि यदि सरकार को RSS की गतिविधियों पर आपत्ति है तो वह स्पष्ट रूप से अपना रुख सामने रखे। विजयेंद्र ने यह भी कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि RSS ने कौन-सी ऐसी गतिविधि की है, जिसे लेकर उसके खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विजयेंद्र ने RSS पर संभावित प्रतिबंध की चर्चा को लेकर सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि बीजेपी किसी भी कथित पिछले दरवाजे की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर भी RSS को लेकर बार-बार बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि गृह विभाग को राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषयों पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए।
‘RSS पर प्रतिबंध लगाने की हिम्मत है तो लगाकर देखें’
विजयेंद्र ने अपने बयान में सरकार को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो RSS पर प्रतिबंध लगाकर देखे। उन्होंने दावा किया कि RSS लंबे समय से देश में सेवा, राष्ट्रवाद और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा संगठन रहा है।
उन्होंने अतीत में RSS पर लगे प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कदमों के बावजूद संगठन कमजोर नहीं हुआ। विजयेंद्र ने सरकार को इतिहास से सीख लेने की सलाह भी दी।
हालांकि, ये सभी आरोप और राजनीतिक दावे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र के बयान के रूप में सामने आए हैं। सरकार अथवा संबंधित पक्ष की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आने पर राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
वाल्मीकि विकास निगम मामले पर सरकार को घेरा

विजयेंद्र ने वाल्मीकि विकास निगम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी व्यक्ति की जाति का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति को मंत्री बनाए जाने के राजनीतिक निर्णय पर सवाल उठा रही है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को जाति का रंग नहीं दिया जाना चाहिए। विजयेंद्र ने दावा किया कि अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए निर्धारित धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला गंभीर है और इसकी राजनीतिक एवं प्रशासनिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति आरोपों से पूरी तरह मुक्त हो जाता है तो बीजेपी को उसके मंत्री बनने पर आपत्ति नहीं होगी। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध व्यक्ति की जाति के आधार पर नहीं बल्कि कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों के आधार पर है।
ST फंड के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई की मांग
विजयेंद्र ने अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए निर्धारित धन के कथित दुरुपयोग को गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समुदाय के कई नेताओं ने उनसे मुलाकात कर इस विषय पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर पार्टी स्तर पर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो राज्य में संघर्ष, पदयात्रा और विरोध प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों पर विचार किया जा सकता है।
जमीर अहमद के प्रभारी मंत्री पद से इनकार पर भी हमला
विजयेंद्र ने मंत्री जमीर अहमद द्वारा विजयनगर जिले के प्रभारी मंत्री का पद लेने से इनकार किए जाने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मंत्रियों को अपने प्रशासनिक दायित्वों से पीछे नहीं हटना चाहिए। विजयेंद्र के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संबंधित जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहराना जनप्रतिनिधियों और सरकार के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने पार्टी संगठन और उपचुनाव संबंधी व्यस्तताओं का हवाला देकर प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी से दूरी बनाने के निर्णय की आलोचना की।
‘तिरंगा फहराना जिम्मेदारी है, विकल्प नहीं’
विजयेंद्र ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगा फहराना केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए राष्ट्रीय जिम्मेदारी का विषय है।
उन्होंने कहा कि मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को अपनी सरकारी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने जमीर अहमद के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की और आरोप लगाया कि इससे प्रभारी मंत्री पद तथा स्वतंत्रता दिवस समारोह की गरिमा पर सवाल उठते हैं।
कर्नाटक की राजनीति में बढ़ सकती है बयानबाजी
बी.वाई. विजयेंद्र के इन आरोपों के बाद कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज होने की संभावना है। एक ओर बीजेपी महिला प्रतिनिधित्व और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं दूसरी ओर RSS से जुड़े मुद्दे पर भी टकराव की स्थिति दिखाई दे रही है।
विजयेंद्र ने सरकार से राज्य के गरीबों, किसानों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार गैर-जरूरी मुद्दों को प्राथमिकता देकर जनता के मूल सवालों से ध्यान भटका रही है।
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