top of page

“भारतार्थ खबर – खबर नहीं, उसका अर्थ”“हर खबर का सही विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“सच्ची खबर, सही अर्थ – भारतार्थ खबर”“जहाँ खबरों का होता है असली विश्लेषण”“ताज़ा खबरें, सटीक विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“हर खबर की गहराई तक – भारतार्थ खबर”“Breaking News से लेकर विशेष रिपोर्ट तक”“देश-दुनिया की हर बड़ी खबर – भारतार्थ खबर”

नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन: क्या “हर दो मिनट में उड़ान” भारत के विकास मॉडल की नई पहचान है?

महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2026: जबरन धर्मांतरण रोकने का प्रयास, किसी धर्म के खिलाफ नहीं – फडणवीस

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 17
  • 2 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

मुंबई। देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल, 2026 किसी भी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल जबरदस्ती, धोखाधड़ी और प्रलोभन के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। उन्होंने सोमवार को विधानसभा में इस विधेयक को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह स्वतंत्रता बल, दबाव या छल के जरिए किसी को धर्म बदलने के लिए मजबूर करने की अनुमति नहीं देती। ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह कानून आवश्यक है।


विधानसभा में यह विधेयक शुक्रवार को गृह (ग्रामीण) राज्य मंत्री पंकज भोयर द्वारा पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि यह कानून उन गतिविधियों पर नियंत्रण लगाएगा, जिनमें लालच, धोखाधड़ी या बल प्रयोग के जरिए धर्म परिवर्तन कराया जाता है।


फडणवीस ने यह भी बताया कि देश के कई राज्यों—जैसे ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान—में पहले से ही इस प्रकार के कानून लागू हैं और महाराष्ट्र ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है।


कानून की प्रमुख बातें:

जबरन, धोखाधड़ी या प्रलोभन के जरिए कराया गया धर्म परिवर्तन अवैध माना जाएगा।

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा और अधिकृत अधिकारियों को पूर्व सूचना देनी होगी।

अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद ही धर्म परिवर्तन को मान्यता दी जाएगी।

केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए गए विवाह को न्यायालय द्वारा अमान्य घोषित किया जा सकता है।


सख्त दंड का प्रावधान

विधेयक में अवैध धर्मांतरण के दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं, नाबालिगों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों से जुड़े मामलों में और अधिक कठोर सजा का प्रस्ताव रखा गया है। पीड़ित व्यक्ति या उनके करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, वहीं कुछ मामलों में पुलिस को भी स्वतः कार्रवाई का अधिकार दिया गया है।


मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है, न कि किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने और लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए यह विधेयक जरूरी कदम है।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page