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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

06 नवंबर /2026 /शुक्रवार

रांची, 5 नवंबर 2026। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री एवं कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए दावा किया है कि देश के 40 लाख युवा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संकेत का इंतजार कर रहे हैं और उनके आह्वान पर सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं। अंसारी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने युवाओं, किसानों, दलितों, छात्रों और मध्यवर्ग की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो देश में गंभीर राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

रांची, 5 नवंबर 2026। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री एवं कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए दावा किया है कि देश के 40 लाख युवा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संकेत का इंतजार कर रहे हैं और उनके आह्वान पर सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं। अंसारी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने युवाओं, किसानों, दलितों, छात्रों और मध्यवर्ग की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो देश में गंभीर राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

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‘मन की बात’ में मोदी का स्वदेशी मंत्र, स्थानीय उत्पादों और नवाचार को बढ़ावा देने की अपील

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
25 अक्टू॰
3 मिनट पठन
मोदी माइक्रोफोन के साथ मन की बात 139वें एपिसोड का पोस्टर, स्थानीय उत्पाद, स्वास्थ्य, खेती, पर्यावरण और रन फॉर यूनिटी के दृश्य।

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करने तथा सामाजिक भागीदारी से विकास को गति देने का संदेश दिया। कार्यक्रम के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने किसानों, युवाओं, कारीगरों और समाजहित में काम करने वाले लोगों के योगदान की सराहना की। दीपावली से पहले उन्होंने लोगों से खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।


‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय उद्यमों को मिलेगी मजबूती


प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल खरीदारी का विकल्प नहीं, बल्कि कारीगरों, छोटे उद्यमियों और पारंपरिक व्यवसायों के प्रयासों को समर्थन देने का माध्यम भी है। उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने के ग्रीस तक पहुंचने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के मालदीव के बाजार में पहुंचने का उदाहरण दिया। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता के साथ आकर्षक और उपयोगी पैकेजिंग को भी महत्वपूर्ण बताया। इस संदर्भ में महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग और बांस से पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग तैयार करने के नवाचारों का उल्लेख किया। संदेश स्पष्ट था कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता, प्रभावी प्रस्तुति और व्यापक बाजार उपलब्ध कराकर उनकी पहुंच बढ़ाई जा सकती है।


प्राकृतिक खेती और नदी संरक्षण की पहल का उल्लेख


प्रधानमंत्री ने पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को प्रोत्साहित करने के प्रयासों और उत्तराखंड में हेंवल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए किए गए कार्यों की चर्चा की। उन्होंने जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पौधरोपण जैसी गतिविधियों में स्थानीय लोगों तथा प्रशासन की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने सामूहिक प्रयासों की भूमिका रेखांकित की। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा और समुदायों की सक्रिय भागीदारी स्थानीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकती है।

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डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान पर जोर


प्रधानमंत्री ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए ई-संजीवनी मंच के माध्यम से लगभग 50 करोड़ टेली-परामर्श पूरे होने की बात कही। इस तरह की सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। हालांकि, इनके प्रभावी उपयोग के लिए डिजिटल सुविधाओं, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच को मजबूत बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने आईआईटी मद्रास में स्थापित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का उल्लेख करते हुए मस्तिष्क अनुसंधान और नई तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।


महर्षि वाल्मीकि और सरदार पटेल के योगदान को किया याद


कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की जयंती और सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के संदर्भ में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने रामायण से मिलने वाली सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता की सीख का उल्लेख किया। इसके साथ ही 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ‘रन फॉर यूनिटी’ में लोगों से भाग लेने की अपील की।


जनभागीदारी को बताया विकास की ताकत


‘मन की बात’ के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम को देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे लोगों के प्रयासों और प्रेरक अनुभवों को सामने लाने का माध्यम बताया। कार्यक्रम में स्वदेशी उत्पादों, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल स्वास्थ्य और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे विषयों को प्रमुखता मिली।

स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने का संदेश ऐसे समय में आया है, जब छोटे उद्यमों और पारंपरिक कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। स्वदेशी उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की रुचि को टिकाऊ बनाने के लिए गुणवत्ता, उचित मूल्य, भरोसेमंद आपूर्ति और प्रभावी विपणन पर भी ध्यान देना होगा।


प्रधानमंत्री के संदेश का मूल भाव यही रहा कि नागरिकों की भागीदारी, स्थानीय प्रतिभा का सम्मान और नवाचार को प्रोत्साहन देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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