top of page
भारतार्थ-logo

बिहार रेलवे क्रॉसिंग पर मिला ‘हिडन कैमरा’ निकला कर्नाटक पुलिस का, आतंकी एंगल की अफवाहों पर विराम

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 10 मई
  • 4 मिनट पठन
Bihar Railway Hidden Camera Case
Bihar Railway Hidden Camera Case

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

वैशाली/मुजफ्फरपुर, 10 मई। बिहार के वैशाली जिले में मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेलखंड के सराय रेलवे गुमटी संख्या 43 सी पर मिले हाई-क्वालिटी हिडन कैमरे को लेकर फैली आतंकी साजिश की आशंकाओं पर अब बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच और विभिन्न एजेंसियों की पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कैमरे का किसी आतंकी संगठन या संदिग्ध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। यह कैमरा दरअसल कर्नाटक पुलिस द्वारा एक हार्डकोर अपराधी की निगरानी के उद्देश्य से लगाया गया था।

घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे थे, जिनमें इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बड़ी साजिश बताया जा रहा था। हालांकि, मुजफ्फरपुर रेल पुलिस ने तथ्यों के आधार पर इन अटकलों को खारिज कर दिया है। रेल एसपी बीना कुमारी ने पुष्टि की कि कर्नाटक पुलिस से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त की गई है और कैमरा निगरानी अभियान का हिस्सा था।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर स्थित सराय स्टेशन के समीप रेलवे फाटक संख्या 43 एसपीएल पर तैनात गेटमैन संतोष कुमार ने दो युवकों को हाईट गेज पर एक छोटा लेकिन अत्याधुनिक कैमरा लगाते देखा। कैमरे के साथ एक छोटा सोलर पैनल भी लगाया गया था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह लगातार निगरानी के लिए तैयार किया गया सिस्टम था।

गेटमैन ने युवकों से पूछताछ की कोशिश की, लेकिन दोनों ने जल्दबाजी में कैमरा इंस्टॉल किया और बाइक से मौके से फरार हो गए। इसके तुरंत बाद स्टेशन मास्टर मनोज कुमार सिंह को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही स्टेशन अधीक्षक स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की गंभीरता को देखते हुए आरपीएफ तथा रेल पुलिस को जानकारी दी गई।

10 मिनट में हटाया गया कैमरा

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रेल थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए लगभग 10 मिनट के भीतर कैमरे को हटवा लिया। इसके बाद कैमरे की तकनीकी जांच शुरू की गई। शुरुआती स्तर पर कैमरे की हाई क्वालिटी और गुप्त तरीके से इंस्टॉलेशन को देखकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी ली और घटनास्थल का निरीक्षण किया। हालांकि, रेल पुलिस ने आधिकारिक तौर पर एनआईए जांच की पुष्टि नहीं की है।

कर्नाटक पुलिस ने मानी प्रक्रिया में चूक

मुजफ्फरपुर रेल पुलिस से हुई बातचीत में कर्नाटक police ने स्वीकार किया कि बिना स्थानीय पुलिस और रेलवे प्रशासन को सूचित किए कैमरा लगाना एक बड़ी प्रशासनिक चूक थी। उनका कहना था कि यदि स्थानीय एजेंसियों को साथ लेकर कार्रवाई की जाती, तो संदिग्ध अपराधी तक पहुंचने में सफलता मिल सकती थी।

बताया जा रहा है कि जिस हार्डकोर अपराधी की तलाश में यह निगरानी अभियान चलाया जा रहा था, उसका पूरा विवरण अब तक रेल पुलिस को साझा नहीं किया गया है। इससे जांच एजेंसियों की जिज्ञासा और बढ़ गई है।

FIR दर्ज, युवकों की तलाश जारी

रेल एसपी बीना कुमारी ने बताया कि स्टेशन अधीक्षक मनोज कुमार सिंह की शिकायत पर दो अज्ञात युवकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब कैमरा लगाने वाले दोनों युवकों की पहचान करने में जुटी है।

इसके लिए आसपास की दुकानों, घरों और रेलवे परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। यदि फुटेज से पर्याप्त सबूत नहीं मिले, तो गेटमैन के बयान के आधार पर आरोपियों का स्केच तैयार कराया जाएगा।

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर पुलिस की अपील

घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे “रेलवे पर आतंकी निगरानी” और “देश विरोधी साजिश” जैसे दावों के साथ वायरल किया गया। रेल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी साझा न करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और निगरानी उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी हो गया है। अन्यथा इस प्रकार की घटनाएं भ्रम और दहशत का कारण बन सकती हैं।

आपके मन में उठ रहे सवाल? (Q&A)

Q1. क्या रेलवे ट्रैक पर मिला कैमरा आतंकी गतिविधि से जुड़ा था?

नहीं। रेल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कैमरे का आतंकी संगठनों से कोई संबंध नहीं मिला है।

Q2. कैमरा किसने लगाया था?

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कैमरा कर्नाटक पुलिस की निगरानी कार्रवाई का हिस्सा था।

Q3. कैमरा क्यों लगाया गया था?

एक हार्डकोर अपराधी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा लगाया गया था।

Q4. क्या NIA ने जांच की?

सूत्रों के मुताबिक NIA अधिकारियों ने जानकारी जुटाई, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Q5. अब आगे क्या होगा?

रेल पुलिस कैमरा लगाने वाले युवकों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।

निष्कर्ष: सुरक्षा समन्वय की कमी ने बढ़ाया भ्रम

यह मामला केवल एक हिडन कैमरे का नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता को भी उजागर करता है। यदि स्थानीय रेलवे प्रशासन और जिला पुलिस को पहले से जानकारी दी जाती, तो सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और अनावश्यक दहशत से बचा जा सकता था। घटना ने यह भी साबित किया कि किसी भी संवेदनशील सूचना पर निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक तथ्यों का इंतजार करना कितना जरूरी है।

Source : स्टेशन अधीक्षक, आरपीएफ, रेल पुलिस, रेल एसपी बीना कुमारी की पुष्टि, मीडिया रिपोर्ट्स एवं कर्नाटक पुलिस जांच पर आधारित है।

Keywords: बिहार रेलवे हिडन कैमरा, वैशाली रेलवे फाटक कैमरा मामला, कर्नाटक पुलिस कैमरा विवाद,

सराय रेलवे गुमटी न्यूज, रेलवे सुरक्षा जांच बिहार

अब आपकी बारी!

इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार।

सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए “Bhaarataarth Khabar” से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें।

Support करें – Like | Share | Follow

ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे।

ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page