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बिहार में सत्ता परिवर्तन तय, नए सीएम पर सस्पेंस चरम पर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 12
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

पटना। बिहार की सियासत इन दिनों निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर जारी अटकलों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार का पर्यवेक्षक नियुक्त कर राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। अब माना जा रहा है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान शीघ्र ही पटना पहुंचेंगे। यहां वे भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होकर नए नेता के नाम का प्रस्ताव रखेंगे। इस बैठक को बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


अनुभवी हाथों में जिम्मेदारी

शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाए जाने के पीछे पार्टी की रणनीति स्पष्ट नजर आती है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के चलते उन्हें बिहार के जटिल जातीय समीकरणों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों—जदयू, हम और लोजपा (रामविलास)—के बीच संतुलन साधने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के भीतर नए चेहरे को आगे लाने की रणनीति से भी इनकार नहीं किया जा रहा है, जैसा कि अन्य राज्यों में देखा गया है। ऐसे में अंतिम फैसला पर्यवेक्षक की रिपोर्ट और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति पर निर्भर करेगा।


दिल्ली में मंथन, फॉर्मूले पर मुहर

इधर, दिल्ली में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व के बीच हाल ही में अहम बैठक हुई, जिसमें बिहार के नए मंत्रिमंडल के गठन और सत्ता संतुलन के फार्मूले पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पावर-शेयरिंग का खाका तैयार किया गया है।


14 अप्रैल को निर्णायक दिन

वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 14 अप्रैल 2026 को कैबिनेट की अंतिम बैठक प्रस्तावित है। मुख्य सचिवालय में होने वाली इस बैठक से पहले नीतीश कुमार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक उनके कार्यकाल की अंतिम कैबिनेट बैठक हो सकती है, जिसमें वे मंत्रियों और अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करेंगे। इसके बाद उनके राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने की संभावना जताई जा रही है।


नई सरकार का काउंटडाउन शुरू

बिहार में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अब सभी की निगाहें भाजपा विधायक दल की बैठक और पर्यवेक्षक के फैसले पर टिकी हैं। यह स्पष्ट है कि राज्य में नई सरकार के गठन का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं, जो न केवल सत्ता संतुलन को बदलेंगे, बल्कि आगामी चुनावी रणनीतियों की दिशा भी तय करेंगे।

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