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दिल्ली दरबार में ‘कर्नाटक क्लाइमेक्स’! राहुल गांधी की बैठक से बढ़ी हलचल, क्या सिद्धारमैया बचाएंगे कुर्सी या DK होंगे नए CM?

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 26 मई
  • 4 मिनट पठन

राहुल गांधी, डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया की दिल्ली बैठक के दौरान कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा करते नेता।
राहुल गांधी, डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया की दिल्ली बैठक के दौरान कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा करते नेता।

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 26 मई। कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर सत्ता संघर्ष के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जारी चर्चाओं ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार सुबह कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi, कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और संगठन महासचिव K. C. Venugopal के साथ होने वाली अहम बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह बैठक केवल कैबिनेट फेरबदल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के भविष्य पर भी बड़ा फैसला सामने आ सकता है। कांग्रेस के भीतर चल रही इस खींचतान ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

2.5-2.5 साल फॉर्मूला फिर चर्चा में क्यों?

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय तक मंथन चला था। उस समय पार्टी हाईकमान ने कथित तौर पर “ढाई-ढाई साल” का फॉर्मूला तय किया था। इसी दावे के आधार पर डीके शिवकुमार खेमे के नेता लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठा रहे हैं।

हालांकि, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अब भी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस हाईकमान केवल कैबिनेट विस्तार या फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इससे सिद्धारमैया की कुर्सी और मजबूत हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस फिलहाल किसी बड़े बदलाव से पहले लोकसभा और आगामी राज्य समीकरणों का आकलन करना चाहती है।

दिल्ली पहुंचते ही क्या बोले सिद्धारमैया और DK?

दिल्ली पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया से कहा कि उन्हें पार्टी हाईकमान ने बुलाया है, लेकिन बैठक का एजेंडा उन्हें नहीं बताया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उन्हें बैठक की जानकारी दी थी।

वहीं डीके शिवकुमार ने कहा कि “कुछ परिस्थितियों में दिल्ली जाना जरूरी हो जाता है।” उनके इस बयान को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

कर्नाटक सरकार में मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी स्वीकार किया कि पार्टी के अंदर कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए यह बैठक बुलाई गई है।

बीजेपी का कांग्रेस पर बड़ा हमला

बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केवल नाममात्र के अध्यक्ष हैं और पार्टी का वास्तविक नियंत्रण गांधी परिवार के हाथ में है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में केरल, हिमाचल और अब कर्नाटक में भी सत्ता संघर्ष चरम पर है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस जनता के मुद्दों से ज्यादा “कुर्सी बचाने” की राजनीति में उलझी हुई है।

केरल मॉडल और केसी वेणुगोपाल की भूमिका क्यों चर्चा में?

कर्नाटक संकट के बीच केरल की राजनीति भी चर्चा में आ गई है। दरअसल, केरल में कांग्रेस की सत्ता वापसी के दौरान मुख्यमंत्री पद के लिए केसी वेणुगोपाल का नाम भी सामने आया था। बताया जाता है कि लगभग 40 विधायक उनके समर्थन में थे, लेकिन पार्टी के भीतर विरोध भी काफी मजबूत था।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उपचुनाव की संभावनाओं और संगठनात्मक संतुलन का हवाला देते हुए केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया था। अंततः पार्टी ने वीडी सतीशन को नेतृत्व सौंपा।

अब सवाल उठ रहा है कि जो नेता केरल में अपने करीबी नेता को मुख्यमंत्री नहीं बना पाए, क्या वही नेतृत्व कर्नाटक में डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ कर पाएगा?

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा संकट क्या?

कांग्रेस के लिए यह केवल नेतृत्व परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती भी है। कर्नाटक फिलहाल कांग्रेस शासित सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है।

यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो पार्टी को संतुलन साधना होगा—

  • ओबीसी नेतृत्व बनाम वोक्कालिगा समीकरण

  • संगठन बनाम सरकार

  • पुराने बनाम नए नेतृत्व का संघर्ष

इसी वजह से राहुल गांधी और हाईकमान बेहद सावधानी से कदम बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं।

Q&A : आपके मन के सवाल

सवाल 1: क्या सिद्धारमैया को हटाया जा सकता है?

फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा लगातार जारी है।

सवाल 2: क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन सकते हैं?

उनका गुट दावा कर रहा है कि ढाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।

सवाल 3: कांग्रेस हाईकमान की प्राथमिकता क्या है?

पार्टी फिलहाल सरकार की स्थिरता और आगामी चुनावी रणनीति पर ध्यान दे रही है।

सवाल 4: केसी वेणुगोपाल की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही है?

वे कांग्रेस संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते हैं और दक्षिण भारत की राजनीति में उनका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है।

निष्कर्ष: क्या कर्नाटक में कांग्रेस नई राजनीतिक पटकथा लिखने जा रही है?

दिल्ली में होने वाली यह बैठक केवल औपचारिक राजनीतिक मुलाकात नहीं मानी जा रही। कांग्रेस के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन, क्षेत्रीय समीकरण और भविष्य की रणनीति का असर आने वाले दिनों में साफ दिखाई दे सकता है।

यदि पार्टी नेतृत्व परिवर्तन करती है तो यह दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा संदेश होगा। वहीं यदि सिद्धारमैया अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहते हैं, तो यह उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन पर पकड़ का बड़ा प्रमाण माना जाएगा।

अब नजरें दिल्ली बैठक के बाद आने वाले संकेतों और कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हैं।

स्रोत: कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक बयान, दिल्ली बैठक से जुड़ी राजनीतिक जानकारी, कर्नाटक कांग्रेस सूत्र, राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स एवं भाजपा प्रतिक्रिया।

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अब आपकी बारी!

  • क्या कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन होना चाहिए?

  • क्या डीके शिवकुमार को मौका मिलना चाहिए या सिद्धारमैया को ही कार्यकाल पूरा करना चाहिए?

अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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