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‘गंदे शहर’ की छवि बदलने की तैयारी में बेंगलुरु, स्वच्छ सर्वेक्षण में 5-स्टार रेटिंग का लक्ष्य

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 days ago
  • 4 min read
 बेंगलुरु के कुमारस्वामी लेआउट में सड़क किनारे कूड़े का ढेर
 बेंगलुरु के कुमारस्वामी लेआउट में सड़क किनारे कूड़े का ढेर

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: बेंगलुरु, 25 मई। देश की टेक राजधानी Bengaluru अब ‘गंदे शहर’ की छवि से बाहर निकलने की बड़ी कोशिश में जुट गई है। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल होने के बाद Bengaluru Solid Waste Management Limited (BSWML) ने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने, कचरा प्रबंधन मजबूत करने और नागरिक शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।

अधिकारियों के अनुसार इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। शहर में ब्लैकस्पॉट की पहचान, कचरा संग्रहण केंद्रों को सक्रिय करना, ठेकेदारों पर सख्ती और शिकायतों के समयबद्ध निवारण जैसे कदमों पर विशेष फोकस किया गया है।

110 में से 74 ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर सक्रिय

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के चीफ मार्शल कर्नल (सेवानिवृत्त) राजभीर सिंह ने बताया कि शहर में कुल 110 ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर (DWCC) मौजूद हैं। पिछले वर्ष कई केंद्र खराब संचालन और निविदा प्रक्रियाओं में देरी के कारण प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाए थे।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष 110 में से 74 केंद्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं और बाकी को भी जल्द चालू करने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का दावा है कि इन केंद्रों के बेहतर संचालन से कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और पुनर्चक्रण प्रणाली मजबूत होगी।

48 घंटे में शिकायत निवारण पर जोर

स्वच्छ सर्वेक्षण में नागरिक शिकायतों के समाधान को अहम मानदंड माना जाता है। बीएसडब्ल्यूएमएल के अनुसार एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के जरिए प्रतिदिन लगभग 150 शिकायतें प्राप्त होती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इनमें से 90 प्रतिशत शिकायतों का समाधान 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है। तय समयसीमा में हल नहीं होने वाली शिकायतों को वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजा जाता है ताकि जवाबदेही तय हो सके।

राजभीर सिंह ने बताया कि प्रत्येक पौराकर्मिका को एक निर्धारित क्षेत्र आवंटित किया गया है, जिसकी निगरानी जूनियर हेल्थ इंस्पेक्टर और मार्शल करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था खराब पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारी और अधिकारी तीनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

ब्लैकस्पॉट और सड़क किनारे कचरे पर सख्ती

शहर में कई स्थानों पर खुले में कचरा फेंकने की समस्या अभी भी बनी हुई है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में कचरा संग्रहण प्रभावी नहीं होने के कारण लोग सड़कों के किनारे कचरा डालने को मजबूर हो जाते हैं।

बीएसडब्ल्यूएमएल ने ऐसे ब्लैकस्पॉट की पहचान कर विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार सुबह 8:30 बजे से पहले इन स्थानों की सफाई सुनिश्चित की जाती है और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नागरिक सहभागिता और नियमित निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

दस्तावेज़ीकरण की कमी बनी चुनौती

बीएसडब्ल्यूएमएल अधिकारियों ने माना कि पिछले वर्षों में किए गए कार्यों का पर्याप्त दस्तावेज़ीकरण नहीं हो पाया था, जिससे स्वच्छ सर्वेक्षण में अंक प्रभावित हुए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार सफाई, पौराकर्मिकों के कल्याण और कचरा प्रबंधन सुधार से जुड़े सभी कार्यों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि सर्वेक्षण टीम के सामने प्रमाणिक डेटा प्रस्तुत किया जा सके।

3-स्टार से 5-स्टार रेटिंग की उम्मीद

बीएसडब्ल्यूएमएल के सीईओ करी गौड़ा ने कहा कि शहरों को अपशिष्ट प्रबंधन, कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और दृश्य स्वच्छता के आधार पर एक से सात स्टार तक की रेटिंग दी जाती है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बेंगलुरु को 3-स्टार रेटिंग मिली थी, जबकि इस बार 5-स्टार रेटिंग हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस वर्ष शहर की रैंकिंग में सुधार देखने को मिल सकता है।

आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A)

Q1. बेंगलुरु को पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में कैसी रैंकिंग मिली थी?

रिपोर्ट के अनुसार शहर को देश के सबसे प्रदूषित शहरों में पांचवें स्थान पर रखा गया था।

Q2. इस बार बीएसडब्ल्यूएमएल ने कौन-कौन से कदम उठाए हैं?

ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर सक्रिय करना, ब्लैकस्पॉट साफ करना, शिकायतों का 48 घंटे में समाधान और ठेकेदारों पर सख्ती जैसे कदम उठाए गए हैं।

Q3. कितने DWCC वर्तमान में सक्रिय हैं?

कुल 110 में से 74 ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर सक्रिय बताए गए हैं।

Q4. नागरिक शिकायतों का समाधान कितने समय में किया जा रहा है?

लगभग 90 प्रतिशत शिकायतों का समाधान 48 घंटे के भीतर करने का दावा किया गया है।

Q5. इस बार बेंगलुरु का लक्ष्य क्या है?

शहर 5-स्टार रेटिंग हासिल करने और स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में सुधार की उम्मीद कर रहा है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते महानगरों में कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यदि प्रशासन तकनीक, जवाबदेही और नागरिक भागीदारी को साथ लेकर चलता है तो स्थिति में बड़ा सुधार संभव है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल सर्वेक्षण रैंकिंग सुधारना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्थायी सफाई मॉडल विकसित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

निष्कर्ष: बेंगलुरु की स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए बीएसडब्ल्यूएमएल द्वारा शुरू किए गए कदम यह संकेत देते हैं कि प्रशासन अब शहर की छवि बदलने को लेकर गंभीर है। यदि शिकायत निवारण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और ठेकेदार जवाबदेही जैसे उपाय प्रभावी साबित होते हैं, तो आने वाले वर्षों में बेंगलुरु देश के स्वच्छ शहरों की सूची में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सफलता केवल सरकारी प्रयासों पर नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर भी निर्भर करेगी।

स्रोत: बीएसडब्ल्यूएमएल अधिकारियों, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी और सार्वजनिक प्रशासनिक जानकारी पर आधारित रिपोर्ट।

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अब आपकी बारी!

  • क्या आपको लगता है कि बेंगलुरु को स्वच्छ बनाने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई काफी है या नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है?

अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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