top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

तृणमूल के नाम और चुनाव चिन्ह विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 4 सप्ताह में दलीलें पूरी करने को कहा

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
29 सित॰
3 मिनट पठन
टीएमसी, ममता बनर्जी, सुप्रीम कोर्ट व चुनाव आयोग की ग्राफिक; गavel, ECI साइन और विरोधी माहौल, तनावपूर्ण राजनीतिक दृश्य

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026। तृणमूल कांग्रेस के नाम और आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्वाचन आयोग के लिए निर्णय की समयसीमा तय कर दी। अदालत ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी दलीलें, जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर विवाद पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। यह मामला ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को लेकर दो गुटों के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर किसी गुट के पक्ष में पार्टी के नाम या चुनाव चिन्ह पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत ने विवाद का अंतिम निर्धारण निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से करने का रास्ता स्पष्ट किया है।


चार सप्ताह में पूरी करनी होगी दलीलें


सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोनों पक्षों को निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी pleadings यानी दलीलें और दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा है। इसके बाद आयोग को तीन महीने में मामले पर फैसला करना होगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए अदालत ने लगभग चार महीने की समयसीमा निर्धारित की है। मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश और पार्टी के नाम तथा चुनाव चिन्ह से संबंधित विवाद का मुद्दा था।


निर्वाचन आयोग ने मूल नाम और चिन्ह पर लगाई है रोक


निर्वाचन आयोग ने 17 सितंबर के अपने अंतरिम आदेश में विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों गुटों के लिए मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अंतरिम व्यवस्था के तहत एक गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिन्ह, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था विवाद के अंतिम निर्णय तक चुनावी प्रक्रिया के संदर्भ में लागू है।


अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया से


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब दोनों पक्षों को निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने दावे और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आयोग इन प्रस्तुतियों और संबंधित साक्ष्यों पर विचार करने के बाद तय समयसीमा में अपना निर्णय देगा। अदालत के निर्देश से यह भी स्पष्ट है कि वर्तमान अंतरिम व्यवस्था को पार्टी के नाम या चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। विवाद का अंतिम निर्धारण निर्वाचन आयोग द्वारा संबंधित चुनावी नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाना है।


आगामी उपचुनावों की पृष्ठभूमि में मामला अहम


पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। इन चुनावों के लिए दोनों गुटों के उम्मीदवारों को अंतरिम रूप से अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के तहत चुनाव लड़ने की व्यवस्था की गई है। मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद फिलहाल उपचुनावों के लिए लागू अंतरिम व्यवस्था बनी रहेगी, जबकि पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगा।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page