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तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: ‘DMK-AIADMK साथ आए तो 107 विधायक देंगे इस्तीफा’, TVK की चेतावनी से बढ़ा राजनीतिक तापमान

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 8
  • 4 min read
तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस, TVK की चेतावनी से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, tamil-nadu-government-crisis-tvk-vijay-dmk-aiadmk.jpg
तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस, TVK की चेतावनी से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, tamil-nadu-government-crisis-tvk-vijay-dmk-aiadmk.jpg

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई, 8 मई। तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के चार दिन बाद भी सत्ता गठन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय की पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कझगम (TVK) सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर होने के कारण सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार है। इसी बीच TVK की ओर से दी गई एक बड़ी चेतावनी ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है।

पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि DMK और AIADMK मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करती हैं, तो TVK के सभी 107 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं। इस बयान ने तमिलनाडु में संभावित राजनीतिक अस्थिरता और नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।

बहुमत से 5 कदम दूर TVK

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। चुनाव में TVK ने 107 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से TVK को समर्थन देने की घोषणा की। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद विजय के खेमे की संख्या 113 तक पहुंच गई, लेकिन अब भी बहुमत के लिए 5 और विधायकों की आवश्यकता है।

सूत्रों के अनुसार TVK अब वामपंथी दलों और छोटे क्षेत्रीय दलों के संपर्क में है ताकि आवश्यक समर्थन जुटाया जा सके। हालांकि दूसरी ओर DMK और AIADMK के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।

DMK-AIADMK गठबंधन की चर्चा क्यों अहम?

तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से एक-दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही DMK और AIADMK यदि साथ आती हैं, तो यह राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम माना जाएगा। चुनाव में DMK को 59 और AIADMK को 47 सीटें मिलीं। दोनों दलों का संयुक्त आंकड़ा 106 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 12 सीट कम है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों दलों की नजदीकी का मुख्य उद्देश्य विजय और उनकी तेजी से उभरती राजनीतिक ताकत को रोकना हो सकता है। यही कारण है कि TVK लगातार इसे “जनादेश के खिलाफ साजिश” बता रही है।

राज्यपाल की भूमिका पर भी उठे सवाल

राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर ने स्पष्ट बहुमत के अभाव में विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया। राज्यपाल ने कहा कि किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 विधायकों का समर्थन पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद से ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

TVK का आरोप है कि सबसे बड़े दल होने के बावजूद उसे अवसर नहीं दिया गया। वहीं संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल का फैसला संविधान सम्मत प्रक्रिया के अनुरूप है, क्योंकि स्पष्ट बहुमत के बिना सरकार गठन जोखिमपूर्ण हो सकता है।

क्या सामूहिक इस्तीफा बनेगा नया राजनीतिक दांव?

TVK द्वारा 107 विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी को राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि यदि उसे सत्ता से दूर रखा गया, तो जनता में सहानुभूति की लहर पैदा हो सकती है। इससे भविष्य में पार्टी और मजबूत होकर उभर सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इतने बड़े स्तर पर इस्तीफे होते हैं, तो राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है और दोबारा चुनाव की नौबत भी आ सकती है। हालांकि अभी तक TVK ने औपचारिक रूप से इस्तीफे की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।

लोगों के मन में उठ रहे बड़े सवाल

Q1. क्या TVK वास्तव में सरकार बना पाएगी?

TVK को सरकार बनाने के लिए अभी भी 5 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।

Q2. क्या DMK और AIADMK का गठबंधन संभव है?

राजनीतिक तौर पर यह बेहद असामान्य माना जाएगा, लेकिन विजय को रोकने के लिए दोनों दल सामरिक सहयोग कर सकते हैं।

Q3. अगर 107 विधायक इस्तीफा देते हैं तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में विधानसभा की संरचना बदल सकती है और राज्य में उपचुनाव या पुनः चुनाव की संभावना बन सकती है।

Q4. राज्यपाल किसे बुला सकते हैं?

जिस दल या गठबंधन के पास 118 विधायकों का समर्थन पत्र होगा, राज्यपाल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसी को आमंत्रित कर सकते हैं।

Q5. क्या तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लग सकता है?

यदि कोई भी दल स्थिर सरकार बनाने में असफल रहता है, तो संवैधानिक विकल्पों में राष्ट्रपति शासन भी शामिल हो सकता है।

राजनीतिक संदेश से आगे बढ़कर जनभावना की परीक्षा

तमिलनाडु की जनता ने इस चुनाव में बदलाव का संकेत जरूर दिया है, लेकिन अब असली चुनौती स्थिर सरकार बनाने की है। विजय की लोकप्रियता ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को नई चुनौती दी है। आने वाले दिनों में छोटे दलों की भूमिका और राज्यपाल का अगला कदम तय करेगा कि तमिलनाडु को नई सरकार मिलती है या राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ती है।

Source: मीडिया रिपोर्ट, राजनीतिक सूत्र और सार्वजनिक चुनावी आंकड़े।

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