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जेडीयू पर नीतीश की पकड़ मजबूत, सत्ता बदलाव के बाद नई रणनीति के संकेत

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 21
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

पटना, 21 अप्रैल 2026। बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद भी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पर नीतीश कुमार की पकड़ मजबूत बनी हुई है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार पार्टी विधायकों के साथ हुई अहम बैठक में उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिए कि संगठन की कमान अब भी उनके हाथों में ही रहेगी।

सोमवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जेडीयू विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुनने का अधिकार सौंप दिया। इस फैसले को पार्टी के भीतर उनकी मजबूत स्थिति और नेतृत्व पर विश्वास के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे जल्द ही पूरे बिहार का दौरा करेंगे और एनडीए सरकार की प्रमुख योजनाओं, खासकर ‘सात निश्चय-3’ के तहत चल रहे कार्यक्रमों पर जनता से सीधे फीडबैक लेंगे। यह कदम सत्ता परिवर्तन के बाद जमीनी स्थिति को समझने और संगठन को सक्रिय बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ते हुए सत्ता सहयोगी भाजपा को नेतृत्व सौंप दिया है। इसके बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर कार्यभार संभाल लिया है। पार्टी के भीतर नेतृत्व संरचना को लेकर भी कई संकेत सामने आए हैं। जेडीयू प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि बैठक के जरिए यह संदेश दिया गया कि “नीतीश कुमार अभी भी पार्टी के केंद्र में हैं।” उन्होंने बताया कि पार्टी ने उनके नेतृत्व में शुरू की गई योजनाओं के लिए धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित किया।


इस बीच, निशांत कुमार की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि वे बैठक में मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्हें पार्टी का संभावित भविष्य नेता माना जा रहा है। संकेत मिल रहे हैं कि वे बिहार विधान परिषद की आगामी खाली सीटों में से किसी एक पर दावेदारी पेश कर सकते हैं। नीरज कुमार के अनुसार, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि नीतीश कुमार के बाद निशांत कुमार पार्टी के सर्वसम्मत नेता हो सकते हैं।” यह बयान जेडीयू में नेतृत्व के भविष्य को लेकर स्पष्ट संकेत देता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता भाजपा को सौंपने के बाद भी नीतीश कुमार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। दिल्ली और पटना के बीच समय बांटते हुए वे राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ बिहार की राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे। कुल मिलाकर, जेडीयू की यह बैठक न सिर्फ संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन रही, बल्कि यह भी स्पष्ट कर गई कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बावजूद पार्टी की कमान अब भी नीतीश कुमार के हाथों में ही केंद्रित है।


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