top of page

“भारतार्थ खबर – खबर नहीं, उसका अर्थ”“हर खबर का सही विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“सच्ची खबर, सही अर्थ – भारतार्थ खबर”“जहाँ खबरों का होता है असली विश्लेषण”“ताज़ा खबरें, सटीक विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“हर खबर की गहराई तक – भारतार्थ खबर”“Breaking News से लेकर विशेष रिपोर्ट तक”“देश-दुनिया की हर बड़ी खबर – भारतार्थ खबर”

नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन: क्या “हर दो मिनट में उड़ान” भारत के विकास मॉडल की नई पहचान है?

कर्नाटक में हिजाब वापसी, असम में UCC की तैयारी: दो राज्यों के फैसलों ने बदली राष्ट्रीय बहस की दिशा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 14
  • 4 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: बेंगलुरु/गुवाहाटी, 14 मई। देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में बुधवार को दो बड़े फैसलों ने नई बहस छेड़ दी। दक्षिण भारत के Karnataka में कांग्रेस सरकार ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया, जबकि पूर्वोत्तर के Assam में भाजपा सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। दोनों राज्यों के फैसले अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विचारधाराओं को दर्शाते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर धर्म, अधिकार और कानून को लेकर बहस को और तेज कर सकते हैं।

एक ओर कर्नाटक सरकार ने धार्मिक प्रतीकों के साथ शिक्षा में समावेशिता का संदेश देने की कोशिश की है, वहीं असम सरकार नागरिक कानूनों में समानता और अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है।

कर्नाटक में हिजाब प्रतिबंध हटाने का फैसला

Siddaramaiah के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2022 में लागू उस आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया है, जिसके तहत शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रभावी रोक लग गई थी। यह आदेश पूर्व मुख्यमंत्री Basavaraj Bommai की भाजपा सरकार के दौरान लागू हुआ था।

नई गाइडलाइन के अनुसार, कक्षा 1 से 12 तक के छात्र-छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म के साथ धार्मिक और पारंपरिक प्रतीक पहन सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि हिजाब, जनेऊ, रुद्राक्ष, शिवधारा और पगड़ी जैसे प्रतीकों की अनुमति रहेगी, बशर्ते वे निर्धारित ड्रेस कोड के पूरक हों।

सरकार ने इस फैसले को सामाजिक समावेश और संवैधानिक स्वतंत्रता से जोड़ा है। आदेश में 12वीं सदी के समाज सुधारक Basaveshwara के सिद्धांत “इवा नम्मवा” का उल्लेख किया गया है, जिसका अर्थ है “वह हमारा ही है।”


स्कूलों और कॉलेजों को दिए गए विशेष निर्देश

राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि किसी भी छात्र के साथ धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव या अपमान की स्थिति न बने। प्रशासन का कहना है कि नई नीति मौजूदा शैक्षणिक सत्र से लागू मानी जाएगी।

हालांकि, नए आदेश में भगवा शॉल को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगे भी विवाद और बहस का कारण बन सकता है।

असम सरकार ने UCC को दी मंजूरी

इसी बीच Himanta Biswa Sarma की अगुवाई वाली असम सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) को कैबिनेट मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रस्तावित विधेयक 26 मई को विधानसभा में पेश किया जाएगा।

सरकार के अनुसार, यह कदम चुनावी वादों को पूरा करने और नागरिक कानूनों में एकरूपता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असम सरकार का प्रस्ताव मुख्य रूप से:

  • विवाह पंजीकरण

  • तलाक पंजीकरण

  • लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्ट्रेशन

  • उत्तराधिकार संबंधी प्रावधान

पर केंद्रित रहेगा।

जनजातीय समुदाय को UCC से बाहर रखा गया

असम सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य की जनजातीय आबादी को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि जनजातीय परंपराओं और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सामाजिक संतुलन बनाए रखने और संभावित विरोध को कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हुईं तेज

कर्नाटक में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार के फैसले का विरोध किया है। विपक्ष के नेता R. Ashoka ने आरोप लगाया कि कांग्रेस “वोट बैंक राजनीति” कर रही है। उन्होंने इसे “तुष्टिकरण की राजनीति” बताया।

वहीं, असम में मुस्लिम संगठनों और विपक्ष के कुछ दलों ने UCC के प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानून प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, असम सरकार का दावा है कि UCC महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और कानूनी समानता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम है।

विवाद की पृष्ठभूमि

कर्नाटक में हिजाब विवाद की शुरुआत उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से हुई थी, जहां छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश से रोका गया था। बाद में यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना और अदालतों तक पहुंचा।

दूसरी ओर, UCC लंबे समय से भारतीय राजनीति और संविधान संबंधी बहस का हिस्सा रहा है। भाजपा इसे समान नागरिक अधिकारों की दिशा में कदम बताती रही है, जबकि कई विपक्षी दल इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं।

आपके मन में उठ रहे सवाल

हालिया फैसलों के बाद देशभर में कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं—

  • क्या हिजाब नीति में बदलाव से शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा?

  • क्या UCC लागू होने से निजी कानूनों में बड़ा बदलाव आएगा?

  • क्या धार्मिक स्वतंत्रता और समान कानून के बीच संतुलन संभव है?

  • क्या अन्य राज्य भी इसी दिशा में कदम उठाएंगे?

  • क्या ये मुद्दे आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक एजेंडा बनेंगे?

Q&A / FAQ सेक्शन

Q1. कर्नाटक सरकार ने क्या फैसला लिया है?

कर्नाटक सरकार ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाकर धार्मिक प्रतीकों की अनुमति दी है।

Q2. क्या केवल हिजाब की अनुमति दी गई है?

नहीं। जनेऊ, रुद्राक्ष, शिवधारा और पगड़ी जैसे अन्य धार्मिक प्रतीकों की भी अनुमति दी गई है।

Q3. असम में UCC कब लागू होगा?

सरकार प्रस्तावित विधेयक को 26 मई को विधानसभा में पेश करेगी। अंतिम लागू होने की प्रक्रिया विधायी मंजूरी पर निर्भर करेगी।

Q4. क्या असम का UCC सभी समुदायों पर लागू होगा?

राज्य सरकार ने जनजातीय समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की बात कही है।

Q5. UCC का मुख्य उद्देश्य क्या बताया गया है?

सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य नागरिक कानूनों में समानता और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

निष्कर्ष: कर्नाटक और असम के फैसले भारत की राजनीति में दो अलग-अलग वैचारिक दिशाओं को सामने लाते हैं। एक राज्य धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता दिख रहा है, जबकि दूसरा समान नागरिक कानून की अवधारणा को आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में ये दोनों मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति, न्यायपालिका और सामाजिक विमर्श के केंद्र में बने रह सकते हैं।

Keywords: कर्नाटक हिजाब समाचार, असम यूसीसी विधेयक, हिजाब पर प्रतिबंध हटाया गया, समान नागरिक संहिता असम, सिद्धारमैया सरकार

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए “Bhaarataarth Khabar” से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें।

Support करें – Like | Share | Follow ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे।

ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।


Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page