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कर्नाटक LC चुनाव में NDA को बड़ा झटका, कांग्रेस की जीत से BJP-JDS में हड़कंपक्रॉस-वोटिंग के आरोपों ने बढ़ाई सियासी गर्मी, NDA खेमे में ‘गद्दारों’ की तलाश तेज

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 19 जून
  • 2 मिनट पठन
 कर्नाटक विधान परिषद चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न और भाजपा-जेडीएस गठबंधन में मंथन का दृश्य।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न और भाजपा-जेडीएस गठबंधन में मंथन का दृश्य।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 19 जून, 2026।

कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। कांग्रेस ने पांच सीटों पर शानदार जीत दर्ज करते हुए भाजपा-जेडीएस गठबंधन को बड़ा झटका दिया है। चुनाव परिणाम सामने आते ही NDA खेमे में हड़कंप मच गया और अब गठबंधन के भीतर क्रॉस-वोटिंग को लेकर गद्दारों की तलाश तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि भाजपा और जेडीएस के कई विधायकों ने गुप्त मतदान में कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन किया।


कांग्रेस उम्मीदवार विनय कार्तिक को सबसे ज्यादा 32 वोट मिले, जो जीत के लिए आवश्यक आंकड़े से काफी अधिक बताए जा रहे हैं। इसी वोट गणित ने विपक्षी गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को अपेक्षा से ज्यादा वोट मिलने के पीछे NDA के भीतर असंतोष और अंदरूनी खींचतान अहम वजह हो सकती है।


भाजपा नेताओं का दावा है कि उनकी पार्टी के केवल तीन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की, जबकि जेडीएस के कम से कम आठ विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया। वहीं जेडीएस नेताओं ने इस आरोप को खारिज करते हुए पलटवार किया है। उनका कहना है कि भाजपा के कई विधायक नाराज चल रहे हैं और वही इस हार के लिए जिम्मेदार हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब खुलकर सामने आने लगा है।


इस चुनावी नतीजे के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश जारकीहोली, बीपी हरीश, एम चंद्रप्पा और एचके सुरेश सहित कई नेताओं के नाम चर्चा में आ गए हैं। वहीं जेडीएस के जीटी देवगौड़ा और एमआर मंजूनाथ भी संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं। हालांकि सभी नेताओं ने क्रॉस-वोटिंग के आरोपों से साफ इनकार किया है।


राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधान परिषद चुनाव में गुप्त मतदान की व्यवस्था होने के कारण असली ‘क्रॉस-वोटर्स’ की पहचान करना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि भाजपा और जेडीएस दोनों दलों में अंदरूनी अविश्वास और असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी जल्द ही गद्दारों की पहचान कर कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। कांग्रेस खेमे में इस जीत को लेकर उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इसे अपनी पहली बड़ी राजनीतिक जीत बताया, हालांकि उन्होंने क्रॉस-वोटिंग पर कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता किसने किसे वोट दिया।


राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिणाम आने वाले दिनों में कर्नाटक NDA गठबंधन के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। भाजपा में पहले से चल रही नेतृत्व की बहस अब और तेज हो सकती है और प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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