ईरान-अमेरिका तनाव का असर: भारत में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, एक हफ्ते में ₹5 तक बढ़े दाम
- धन्ना राम चौधरी

- 23 मई
- 4 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली, 23 मई 2026। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का असर अब सीधे भारतीय आम जनता की जेब पर दिखाई देने लगा है। शनिवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी कर दी। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया। नई दरों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
इस ताजा बढ़ोतरी ने देशभर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट गहराता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
महानगरों में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें
महानगर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर)
दिल्ली 99.51 (+0.87) 92.49 (+0.91)
कोलकाता 110.64 (+0.94) 97.02 (+0.95)
मुंबई 108.49 (+0.90) 95.02 (+0.94)
चेन्नई 105.31 (+0.82) 96.98 (+0.87)
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके जवाब में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की आशंका जताई जा रही है। यही समुद्री मार्ग दुनिया के बड़े हिस्से में तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इसके साथ ही रुपये की कमजोरी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत कमजोर हो चुका है और वर्तमान विनिमय दर लगभग ₹95.6 प्रति डॉलर बताई जा रही है।
एक सप्ताह में तीसरी बढ़ोतरी
इस महीने 15 मई को पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 19 मई को करीब 90 पैसे की दूसरी वृद्धि हुई। अब 23 मई को तीसरी बार दाम बढ़ाए गए हैं। इस तरह एक सप्ताह के भीतर ईंधन की कीमतों में लगभग ₹5 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
तेल विपणन कंपनियों — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited — ने पहले ही संकेत दिया था कि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण उन्हें भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर 9 से 12 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
आम जनता और बाजार पर क्या असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल महंगे होने से केवल वाहन चालकों की जेब पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दालों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। इससे खुदरा महंगाई दर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर के जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि होगी, जिसका असर ई-कॉमर्स, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ेगा।
आपके मन में उठ रहे सवाल
क्या पेट्रोल ₹110 के पार जा सकता है?
विश्लेषकों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं और पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ, तो कई राज्यों में पेट्रोल ₹110 प्रति लीटर के पार जा सकता है।
क्या सरकार टैक्स कम कर सकती है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें एक्साइज ड्यूटी या वैट में कटौती कर राहत दे सकती हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
क्या डीजल महंगा होने से महंगाई और बढ़ेगी?
हाँ। भारत में माल परिवहन का बड़ा हिस्सा डीजल आधारित है। डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, जिसका असर आम वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।
क्या इलेक्ट्रिक वाहन की मांग बढ़ सकती है?
ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की मांग बढ़ने की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं।
तथ्यों की जांच: क्या यह बढ़ोतरी सीधे युद्ध की वजह से हुई?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा है। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव इन परिस्थितियों को और गंभीर बना रहा है।
निष्कर्ष: पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें भारत की आयात-निर्भर ऊर्जा व्यवस्था की बड़ी चुनौती को उजागर कर रही हैं। आने वाले समय में सरकार के सामने महंगाई नियंत्रित करने और आम जनता को राहत देने की दोहरी चुनौती रहेगी। ऊर्जा विशेषज्ञ अब भारत में वैकल्पिक ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं ताकि भविष्य में वैश्विक संकटों का असर कम किया जा सके।
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार विश्लेषण, सरकारी तेल विपणन कंपनियों के आधिकारिक आंकड़े।
कीवर्ड: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, आज भारत में पेट्रोल की कीमत, डीजल की कीमतों में वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी खबरें
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