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असम में UCC लागू: बहुविवाह पर बैन, लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य; विधानसभा में हंगामे के बीच बिल पास

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 days ago
  • 4 min read
“असम विधानसभा में UCC बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा”
“असम विधानसभा में UCC बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

गुवाहाटी, 27 मई। Assam विधानसभा ने लंबी बहस, विपक्षी हंगामे और तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ असम, Uttarakhand और Gujarat के बाद देश का तीसरा राज्य बन गया है जिसने अपने स्तर पर UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

नए कानून के तहत राज्य में बहुविवाह (Polygamy) और द्विविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक समानता और पारदर्शी पारिवारिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इसे “महिलाओं की गरिमा और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया है। वहीं विपक्ष ने इस विधेयक को “राजनीतिक एजेंडा” और “संवैधानिक अधिकारों पर हस्तक्षेप” करार दिया है।

क्या हैं असम UCC बिल के प्रमुख प्रावधान?

असम सरकार द्वारा पारित समान नागरिक संहिता विधेयक विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग व्यवस्थाओं के बजाय समान नियम लागू करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।

मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

-राज्य में बहुविवाह और द्विविवाह पूरी तरह गैरकानूनी होंगे।

-नियम उल्लंघन पर अधिकतम 7 साल तक की जेल का प्रावधान।

-लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण।

-रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने तक की जेल संभव।

-अनुसूचित जनजातियों (ST) को कानून के दायरे से बाहर रखा गया।

-विवाह और पारिवारिक विवादों में समान कानूनी ढांचा लागू करने की तैयारी।

महिला सुरक्षा और सामाजिक सुधार पर सरकार का जोर

सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि महिलाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार का तर्क है कि बहुविवाह पर रोक और विवाह संबंधी समान नियम महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सम्मान प्रदान करेंगे।

सरकार ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा में मदद मिलेगी। राज्य सरकार इसे सामाजिक सुधार और पारिवारिक जवाबदेही से जोड़कर देख रही है।

विपक्ष ने उठाए संवैधानिक और कानूनी सवाल

Indian National Congress और All India United Democratic Front (AIUDF) ने बिल का जोरदार विरोध किया। विपक्ष का कहना है कि जब अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से बाहर रखा गया है, तो इसे “समान” नागरिक संहिता कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।

विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी, बाढ़ और शिक्षा जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के विधेयक ला रही है।

कुछ विधायकों ने लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को नागरिकों की निजी स्वतंत्रता और गोपनीयता के अधिकार से जोड़ते हुए अदालत में चुनौती की संभावना भी जताई।

अनुच्छेद 44 और UCC पर फिर शुरू हुई बहस

भारतीय संविधान का Article 44 of the Constitution of India राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने की बात करता है। हालांकि, देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के कारण यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि असम मॉडल में जनजातीय समुदायों को छूट देकर सरकार ने सांस्कृतिक संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन यही छूट भविष्य में कानूनी बहस का केंद्र भी बन सकती है।

देश की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, असम में UCC लागू होने के बाद अन्य राज्यों में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक विमर्श दोनों में अहम भूमिका निभा सकता है।

असम UCC: आपके मन में उठ रहे सवाल | FAQ

Q1. असम UCC बिल के तहत बहुविवाह पर क्या सजा है?

नए कानून के अनुसार बहुविवाह या द्विविवाह करने पर अधिकतम 7 साल तक की जेल हो सकती है।

Q2. क्या लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा?

हाँ। असम में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।

Q3. यदि कोई रजिस्ट्रेशन नहीं कराए तो क्या होगा?

ऐसे मामलों में 3 महीने तक की जेल या अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

Q4. किन समुदायों को इस कानून से बाहर रखा गया है?

राज्य की अनुसूचित जनजातियों (ST) को उनकी सांस्कृतिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं के संरक्षण के लिए कानून से बाहर रखा गया है।

Q5. विपक्ष इस कानून का विरोध क्यों कर रहा है?

विपक्ष का कहना है कि यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गोपनीयता और संवैधानिक समानता से जुड़े सवाल खड़े करता है।

सोर्स: असम विधानसभा चुनाव, राज्य सरकार के ऑफिशियल बयान, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का संबोधन, विपक्ष की प्रतिक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी पब्लिक जानकारी।

फोकस कीवर्ड्स: असम UCC बिल, हिमंत बिस्वा सरमा, यूनिफॉर्म सिविल कोड असम, लिव-इन रजिस्ट्रेशन लॉ, पॉलीगैमी बैन असम

निष्कर्ष: असम में पारित UCC विधेयक केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का नया अध्याय भी माना जा रहा है। जहां सरकार इसे महिला सुरक्षा और सामाजिक सुधार का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा मान रहा है। आने वाले दिनों में इस कानून की न्यायिक समीक्षा और इसके सामाजिक प्रभाव पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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