'भारत का समय आ गया है': मोहन भागवत का बड़ा संदेश, दुनिया के सामने भारतीय विचार का रास्ता बताया
- धन्ना राम चौधरी

- 5 जून
- 4 मिनट पठन
RSS प्रमुख बोले- दुनिया अधिकार, समाज और पर्यावरण के संतुलन में उलझी; भारत के पास मानवता को दिशा देने वाला दृष्टिकोण

भारतार्थ खबर | संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
डेटलाइन: नागपुर, 05 जून 2026|
Mohan Bhagwat Statement: 'भारत का समय आ गया है', दुनिया को भारतीय दृष्टि से समाधान मिलने की उम्मीद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में आयोजित स्वयंसेवी प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में एक महत्वपूर्ण संबोधन देते हुए कहा कि दुनिया आज कई प्रकार की दुविधाओं और चुनौतियों में उलझी हुई है, लेकिन भारत के पास मानव जीवन के संतुलित विकास का ऐसा दृष्टिकोण है जो वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकता है।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि वर्तमान विश्व व्यवस्था व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने में संघर्ष कर रही है। उनका मानना है कि दुनिया के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विकास, सामाजिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ कैसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराएं इस दिशा में मार्गदर्शन देने की क्षमता रखती हैं।
दुनिया विकास के मॉडल को लेकर असमंजस में
RSS प्रमुख ने कहा कि आधुनिक दुनिया मानव शरीर, मन और बुद्धि के अलग-अलग विकास की बात तो करती है, लेकिन इन तीनों के समन्वित विकास का प्रभावी मॉडल अभी तक विकसित नहीं कर पाई है।
उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक प्रगति या भौतिक विकास मानव जीवन को पूर्ण नहीं बना सकता। व्यक्ति के मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास को समान महत्व देना आवश्यक है। भागवत के अनुसार, जब तक इन सभी आयामों का संतुलित विकास नहीं होगा, तब तक स्थायी शांति और समृद्धि संभव नहीं है।
वैश्विक संघर्षों का असर पूरी दुनिया पर
अपने भाषण में उन्होंने वैश्विक संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय तनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज किसी एक क्षेत्र में होने वाली घटना का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दो देशों के बीच संघर्ष होता है, तो उसका प्रभाव ऊर्जा, व्यापार और अर्थव्यवस्था के माध्यम से अन्य देशों तक पहुंचता है। ऐसे में विश्व को ऐसे मॉडल की आवश्यकता है जो प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और संतुलन को बढ़ावा दे।
अधिकार बनाम समाज, विकास बनाम पर्यावरण
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया आज भी व्यक्तिगत अधिकारों और सामाजिक हितों के बीच संतुलन खोजने में संघर्ष कर रही है। कई बार व्यक्ति को अधिक अधिकार देने पर सामाजिक हित प्रभावित होते हैं, जबकि समाज को प्राथमिकता देने पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रश्न उठते हैं।
इसी प्रकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच भी टकराव की स्थिति दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भौतिक विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग किया जाता है, जबकि पर्यावरण संरक्षण की मांग विकास की गति को प्रभावित कर सकती है।
उनके अनुसार, दुनिया अभी तक ऐसा व्यापक समाधान नहीं खोज पाई है जो विकास, पर्यावरण और मानव कल्याण को एक साथ आगे बढ़ा सके।
भारत की भूमिका पर जताया विश्वास
RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया अब संघर्ष और स्वार्थ आधारित विकास मॉडल के विकल्प तलाश रही है। ऐसे समय में भारत के पास अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन दृष्टि के आधार पर वैश्विक नेतृत्व का अवसर है।
उन्होंने कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और आर्थिक समृद्धि का केंद्र रहा है। वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि देश अपने मूल मूल्यों को पुनः पहचानते हुए उन्हें आधुनिक संदर्भों में लागू करे।
भागवत ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन का नेतृत्व कर सकता है।
उद्योग जगत की भी रही मौजूदगी
कार्यक्रम में देश के प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। शिविर के समापन अवसर पर स्वयंसेवकों को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सेवा कार्यों के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया गया।
फैक्ट बॉक्स
कार्यक्रम: RSS स्वयंसेवी प्रशिक्षण शिविर समापन समारोह
स्थान: नागपुर, महाराष्ट्र
मुख्य वक्ता: मोहन भागवत
मुख्य विषय: वैश्विक चुनौतियां, भारतीय विचार, विकास और पर्यावरण संतुलन
मुख्य अतिथि: कुमार मंगलम बिरला
FAQ
प्रश्न 1: मोहन भागवत ने अपने संबोधन में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि दुनिया कई दुविधाओं में उलझी हुई है और भारत के पास संतुलित विकास का मार्ग दिखाने की क्षमता है।
प्रश्न 2: कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?
उत्तर: नागपुर में RSS के स्वयंसेवी प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में।
प्रश्न 3: भागवत ने किन प्रमुख मुद्दों का उल्लेख किया?
उत्तर: विकास, पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तिगत अधिकार, सामाजिक हित और वैश्विक संघर्ष।
प्रश्न 4: भारत की भूमिका को लेकर उन्होंने क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि दुनिया वैकल्पिक विकास मॉडल खोज रही है और भारत के पास नेतृत्व करने का अवसर है।
प्रश्न 5: कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन थे?
उत्तर: उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला।
News Source : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा नागपुर में आयोजित स्वयंसेवी प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत का सार्वजनिक संबोधन एवं उपलब्ध आधिकारिक जानकारी।
निष्कर्ष: नागपुर में दिए गए अपने संबोधन में मोहन भागवत ने वैश्विक चुनौतियों, विकास मॉडल और भारत की संभावित भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। उनका संदेश केवल भारत की उपलब्धियों का उल्लेख नहीं था, बल्कि भविष्य में संतुलित और समावेशी विकास की आवश्यकता पर भी केंद्रित था। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित कर वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत बनाता है।
आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?
क्या भारत दुनिया को संतुलित विकास का नया मॉडल दे सकता है?
क्या विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं?
क्या भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक वैश्विक चुनौतियों का समाधान दे सकती है?
अब आपकी बारी!
इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।
राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार।
सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें।
Support करें – Like | Share | Follow
ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे।
ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।
_edited.jpg)



टिप्पणियां