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₹35 हजार में गर्भ का राज खोलने वाला रैकेट बेनकाब: राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर अवैध भ्रूण लिंग जांच गिरोह का पर्दाफाश

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 23
  • 4 min read
“राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर भ्रूण लिंग जांच रैकेट का खुलासा, पुलिस कार्रवाई और जब्त मोटरसाइकिल”
“राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर भ्रूण लिंग जांच रैकेट का खुलासा, पुलिस कार्रवाई और जब्त मोटरसाइकिल”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

झुंझुनूं/नारनौल, 23 मई 2026। राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर अवैध भ्रूण लिंग जांच करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। PCPNDT Team Narnaul और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में डिकॉय ऑपरेशन के जरिए इस रैकेट का भंडाफोड़ किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह 35 हजार रुपये लेकर गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग बताने का काम कर रहा था।

कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह से जुड़े तीन अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। मामले ने एक बार फिर भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डिकॉय ऑपरेशन से खुला राज

जानकारी के अनुसार PCPNDT Team को सूचना मिली थी कि राजस्थान-हरियाणा सीमा क्षेत्र में सक्रिय कुछ लोग अवैध तरीके से भ्रूण लिंग जांच कर रहे हैं। इसके बाद टीम ने एक गर्भवती महिला और केयरटेकर को डिकॉय ऑपरेशन में शामिल किया।

केयरटेकर विकास ने मोबाइल फोन के जरिए बड़बर निवासी Shishram से संपर्क किया। बातचीत के दौरान 35 हजार रुपये में भ्रूण लिंग जांच कराने का सौदा तय हुआ। आरोपियों ने डिकॉय टीम को गांव गोद के पास फ्लाईओवर के नीचे बुलाया।

बाइक पर बैठाकर सुनसान इलाके में ले गए

टीम के अनुसार वहां मोटरसाइकिल पर पहुंचे आरोपी Dhantar ने गर्भवती महिला से नकद 35 हजार रुपये लिए। इसके बाद वह महिला को बाइक पर बैठाकर बुहाना होते हुए सिरसला मार्ग से भैंसावता कलां की ओर ले गया।

रेड टीम लगातार पीछा कर रही थी, लेकिन रात का अंधेरा और अधिक यातायात होने के कारण आरोपी कुछ समय के लिए नजरों से ओझल हो गए।

मुर्गीफार्म में अल्ट्रासाउंड जांच का आरोप

डिकॉय महिला के बयान के अनुसार उसे एक सुनसान इलाके में स्थित मुर्गीफार्म पर ले जाया गया, जहां पहले से दो व्यक्ति मौजूद थे। महिला ने उनके नाम Ravi और Antar बताए।

महिला के अनुसार वहां एक कमरे में अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य उपकरणों की मदद से जांच की गई। जांच के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि गर्भ में लड़की है।

सूत्रों के अनुसार जांच के बाद आरोपी धंतर ने 35 हजार रुपये कथित डॉक्टर रवि को सौंप दिए और बाद में राशि आपस में बांट ली गई।

वापसी के दौरान आरोपी गिरफ्तार

रेड टीम ने पहले से जाल बिछा रखा था। रात करीब 11 बजे जब आरोपी धंतर महिला को वापस गांव गोद फ्लाईओवर के पास छोड़ने पहुंचा, तभी टीम ने उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान Dhantar के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और 1500 रुपये की चिन्हित राशि बरामद की है।

इसके बाद आरोपी को Sadar Police Station Narnaul के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, नकद राशि, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

PCPNDT कानून के तहत सख्त कार्रवाई संभव

भारत में भ्रूण लिंग जांच और लिंग चयन को रोकने के लिए Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act यानी PCPNDT Act लागू है। इस कानून के तहत भ्रूण का लिंग बताना और ऐसी जांच कराना दोनों दंडनीय अपराध हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

समाज के सामने बड़ा सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक के दुरुपयोग और बेटा-बेटी के भेदभाव की मानसिकता के कारण आज भी कई क्षेत्रों में भ्रूण लिंग जांच जैसे अवैध नेटवर्क सक्रिय हैं। सरकार और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद ऐसे मामले सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है।

आपके मन में उठ रहे सवाल

भ्रूण लिंग जांच अवैध क्यों है?

भारत में कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लैंगिक संतुलन बनाए रखने के लिए भ्रूण लिंग जांच पर प्रतिबंध लगाया गया है।

PCPNDT Act क्या है?

यह कानून गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया है।

दोषियों को कितनी सजा हो सकती है?

दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कारावास, लाइसेंस रद्द होने और भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

क्या केवल डॉक्टर ही आरोपी होते हैं?

नहीं। ऐसे मामलों में दलाल, सहयोगी, तकनीकी सहायता देने वाले लोग और जांच कराने वाले व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

तथ्यों की जांच: क्या आरोपियों ने गर्भ में लड़की होने की जानकारी दी?

डिकॉय महिला के बयान और जांच टीम की कार्रवाई के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर भ्रूण के लड़की होने की जानकारी दी थी। मामले की विस्तृत जांच जारी है और अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।

निष्कर्ष: राजस्थान-हरियाणा सीमा पर सक्रिय इस रैकेट का खुलासा केवल एक आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश नहीं, बल्कि समाज में अब भी मौजूद लैंगिक भेदभाव की मानसिकता को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, सख्त कानूनी कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता के बिना ऐसे नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। अब जांच एजेंसियों की नजर फरार आरोपियों और इस नेटवर्क से जुड़े संभावित अन्य लोगों पर है।

स्रोत: पीसीपीएनडीटी टीम नारनौल, पुलिस कार्रवाई और प्रारंभिक जांच से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी।

कीवर्ड्स: अवैध लिंग परीक्षण, PCPNDT अधिनियम समाचार, राजस्थान-हरियाणा सीमा अपराध, भ्रूण लिंग परीक्षण रैकेट, झुंझुनू समाचार

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