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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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29वें सप्ताह में जन्मे एलियाह ने जीती जिंदगी की जंग, 52 दिन बाद NICU से मिली छुट्टी

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
11 अक्टू॰
3 मिनट पठन
बेंगलुरु के SDAMC अस्पताल में 52 दिन NICU में उपचार के बाद घर लौटे समय से पहले जन्मे बेबी एलियाह एलोरी।

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 11 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु के फ्रेजर टाउन स्थित सेवेंथ-डे एडवेंटिस्ट मेडिकल सेंटर (SDAMC) में 29वें सप्ताह में जन्मे नन्हे एलियाह एलोरी ने 52 दिनों तक नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में उपचार के बाद घर वापसी की है। जन्म के समय महज एक किलोग्राम वजन वाले एलियाह को सांस लेने में परेशानी सहित कई गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं का सामना करना पड़ा। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों और नर्सिंग टीम की निरंतर देखभाल के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई।


समय से पहले जन्म, शुरुआत से ही गंभीर चुनौतियां


एलियाह का जन्म 12 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 32 मिनट पर श्रीमती विवियन और श्री हेमंत के घर हुआ। गर्भावस्था के केवल 29वें सप्ताह में जन्म लेने के कारण उन्हें तत्काल विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी। निर्धारित प्रसव समय से काफी पहले जन्म और बेहद कम वजन ने उनकी स्थिति को संवेदनशील बना दिया था। प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. पर्लिन राज चावाकुला की देखरेख में प्रसव के बाद नवजात को NICU में भर्ती किया गया। वहां निदेशक डॉ. एडविन राज तलारी के नेतृत्व में डॉ. प्रियंका, डॉ. सिल्विया और समर्पित नर्सिंग टीम ने उनके उपचार की जिम्मेदारी संभाली। नर्सिंग टीम का नेतृत्व सिस्टर यशोदा हलेमाने ने किया।


दो बार रुकी हृदय गति, कई गंभीर जटिलताओं से मुकाबला


अस्पताल के अनुसार, जन्म के शुरुआती घंटों में एलियाह को सर्फैक्टेंट थेरेपी और वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। उनके फेफड़ों में न्यूमोथोरैक्स और न्यूमोमीडियास्टिनम जैसी गंभीर समस्याएं विकसित हुईं, जिनके उपचार के लिए चेस्ट ड्रेन डालना पड़ा। उपचार के दौरान एलियाह को दो बार कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ा। दोनों अवसरों पर चिकित्सा टीम ने तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) किया। अस्पताल की जानकारी के मुताबिक, दोनों बार उनकी हृदय गति और रक्त संचार बहाल करने में सफलता मिली। इसके बाद भी उनकी स्थिति कई बार चुनौतीपूर्ण बनी रही। उन्हें गंभीर संक्रमण और सेप्टिक शॉक, किडनी की कार्यक्षमता में अचानक गिरावट, प्लेटलेट्स की कमी, रक्त के थक्कों से जुड़ी समस्याओं, फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप और दौरे जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ा। पोषण देने में कठिनाइयों के साथ फेफड़े से संबंधित समस्या भी दोबारा सामने आई। इन परिस्थितियों में एलियाह को लगातार निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की जरूरत रही। परिवार के लिए यह अवधि चिंता और अनिश्चितता से भरी थी। अस्पताल के विवरण के अनुसार, परिवार ने कठिन समय में प्रार्थना और विश्वास के सहारे उम्मीद बनाए रखी।




चिकित्सकों और नर्सिंग टीम के समर्पण की सराहना


NICU के निदेशक डॉ. एडविन राज तलारी ने कहा कि एलियाह के उपचार के 52 दिन संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयास के दिन रहे। उन्होंने उनके परिवार के विश्वास, शिशु के जीवट तथा डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक प्रयासों को इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। नवजात गहन चिकित्सा इकाई में समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को विशेष निगरानी, सांस लेने में सहायता, संक्रमण नियंत्रण और पोषण संबंधी देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। एलियाह का मामला इस बात को रेखांकित करता है कि ऐसी परिस्थितियों में समय पर उपचार और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है।


52 दिनों के बाद परिवार में लौटी खुशियां


एलियाह की घर वापसी उनके परिवार के लिए राहत और खुशी का अवसर है। अस्पताल में बिताए गए लंबे समय के बाद अब परिवार के सामने जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है। अस्पताल ने इस अवसर को शिशु, उसके परिजनों और उपचार में जुटी टीम के सामूहिक प्रयासों की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है।

सेवेंथ-डे एडवेंटिस्ट मेडिकल सेंटर पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहा है। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राजकुमार चावाकुला के नेतृत्व में संचालित यह संस्थान मरीजों की देखभाल के विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं देता है। यह अस्पताल विश्वव्यापी सेवेंथ-डे एडवेंटिस्ट संगठन का हिस्सा है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के साथ शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में भी कार्य करता है। एलियाह की कहानी समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं की देखभाल में चिकित्सा विशेषज्ञता, निरंतर निगरानी और परिवार के सहयोग के महत्व को सामने लाती है। 52 दिनों के उपचार के बाद उसकी घर वापसी परिवार के लिए नई उम्मीद और राहत का संदेश लेकर आई है। समाचार प्रेषक प्रवीण कुमार पांडेय बेंगलुरु।




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