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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


भरत मिलाप के प्रसंग से गूंजा त्याग और भाईचारे का संदेश
भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलूरू, 25 अगस्त 2026। मातेश्वरी भक्त मंडल के तत्वावधान में होसूर बंडे स्थित श्रीकृष्णा गोसेवा आश्रम गोशाला में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का विशेष संगम देखने को मिला। कथा वाचक संत किशोरचन्द रामायणी ने भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत के अटूट प्रेम, त्याग, समर्पण और भाईचारे से जुड़े भरत मिलाप के पावन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। प्रसंग के दौरान कथा पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा और अने

धन्नाराम चौधरी
26 अग॰2 मिनट पठन


गोस्वामी तुलसीदास का काव्य में परिवार प्रबोधन
डॉ. वीरमाराम पटेल लेखक एवं कवि, गुड़ामालानी, बालोतरा भारत की पहचान विश्व में परिवार व्यवस्था के कारण अनोखी है। परिवार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और वर्तमान में इसी धरोहर का आधार है महाकवि तुलसीदास के साहित्य में निहित परिवार भाव। उनके साहित्य में परिवार का आवरण केवल रक्त के रिश्ते से नहीं अपितु जड़-चेतन के प्रति परिवार भाव है। प्रभु श्री राम परिवार परिवेश को अगर आदर्श आमने तो आज वहीं भाव हमारे समाज के परिवारों का है लेकिन आज के परिवार बिखराव के दौर में है। प्रभु श्री का परिवार

धन्नाराम चौधरी
19 अग॰3 मिनट पठन
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